जमशेदपुर : अष्टांग योग आठ अंगो यानी योग की आठ मुद्राओं से मिलकर बनता है। अष्टांग योग में जिन आठ अंगों की चर्चा की गई है, वे है यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। ये सभी आठ अंग एक साथ काम करते हैं, न कि क्रम में। इसका मतलब यह नहीं है कि आसन का अभ्यास आज करें या फिर 25 साल बाद समाधि प्राप्त करने के बारें में सोंचे। अष्टांग योग हमारे शरीर के कई हिस्सों को फायदा पहुंचाता है और इसमे हमें शारीरिक ताकत मिलती है।

सोनारी की योगा व रेकी एक्सपर्ट पूनम वर्मा बताती हैं कि हमें नियमित रूप से योगा करनी चाहिए। सभी योग में अष्टांग योग को उत्तम माना गया है। आज जानेंगे कि अष्टांग योग के अभ्यास से क्या-क्या फायदे मिलते हैं...

पहले जानेंगे अष्टांग योग क्या है

योग गुरु अक्षर के मुताबिक अष्टांग योग में कई शारीरिक मुद्राएं शामिल है जिन्हें आसन, प्राणायाम या ब्रीदिंग तकनी और ध्यान अभ्यास के रूप में जाना जाता है। अष्टांग योग में अभ्यास करने वालों के लिए बहुत से चुनौतीपूर्ण योग आसन जैसे वृश्चिकासन, कालभैरवासन, शीर्षासन वगैरह होते हैं।

इसमें भ्रामरी प्राणायाम जैसी प्राणायम तकनीकें भी है जिनका अभ्यास खड़े होकर, पेड़ की शाखा पर बैठकर और पानी में डूबे रहने के दौरान ककिया जा सकता है। कपाल भार्ती एक और शक्तिशाली प्राणायाम है।

अष्टांग योग के फायदे

  • अष्टांग योग का अभ्यास करने से शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अष्टांग योग में शामिल योगासन मांसपेशियों को मजबूत बनाने, शरीर को लचीला बनाने, रेम्पाइरेटरी सिस्टम में सुधार करने और दिल की क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • डायबिटीज की समस्या में भी अष्टांग योग फायदेमंद होता है। योग के कई आसनों के अभ्यास से ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम किया जा सकता है।
  • अष्टांग योग में शामिल आसान व प्राणायाम दिमाग को शांत रखने व तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

Edited By: Jitendra Singh