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कोल्हान विश्वविद्यालय के खिलाफ छात्रों का मोर्चा: दो साल की पढ़ाई में लग रहे चार साल, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र

Published: Tue, 18 Aug 2026 02:05 PM (IST)

कोल्हान विश्वविद्यालय में परीक्षाओं और परिणामों में लगातार देरी से नाराज छात्रों ने भूख हड़ताल की। वे समय पर शैक्षणिक ...और पढ़ें

मंगलवार को विश्वविद्यालय के छात्र जमशेदपुर स्थित उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठ गए।

मंगलवार को विश्वविद्यालय के छात्र जमशेदपुर स्थित उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठ गए।

HighLights

  1. कोल्हान विश्वविद्यालय में परीक्षाओं और परिणामों में लगातार देरी।

  2. छात्रों ने जमशेदपुर डीसी कार्यालय पर भूख हड़ताल की।

  3. समय पर परीक्षा, परिणाम और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

जासं, जमशेदपुर। कोल्हान विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के आयोजन और परीक्षा परिणामों के प्रकाशन में हो रही लगातार देरी के खिलाफ विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। 
 
लंबित सत्रों और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज छात्र अब विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन की राह पर निकल पड़े हैं।
 
मंगलवार को विश्वविद्यालय के छात्र जमशेदपुर स्थित उपायुक्त (DC) कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठ गए।
 

जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने की मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों का स्पष्ट कहना है कि यह भूख हड़ताल भले ही एक दिवसीय है, लेकिन यह विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली के खिलाफ बड़े आंदोलन की शुरुआत है। 
 
अधिकारियों की जवाबदेही तय न होने के कारण दो साल का कोर्स चार साल में, तीन साल की पढ़ाई पांच साल में और चार साल की डिग्री छह साल में पूरी हो रही है। 
 
इस लेट-लतीफी के कारण विद्यार्थी न तो समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो पा रहे हैं और न ही उच्च शिक्षा के लिए अन्य संस्थानों में नामांकन ले पा रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के दौर में सत्र विलंबित होने से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
 

अकादमिक कैलेंडर लागू करने की मुख्य मांग

भूख हड़ताल पर बैठे छात्र राहुल रघुवंशी, शशि, सुमित, विशाल कुमार, आसिफ अंसारी, अनुज सिंह, मोहन कुमार और विशाल यादव ने कहा कि बिना छात्र आंदोलन के प्रशासन की नींद नहीं खुलती। छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:

  •     राज्य सरकार और विवि प्रशासन निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार समय पर परीक्षाएं आयोजित करे।
  •     सभी परीक्षाओं का परिणाम तय समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से प्रकाशित किया जाए।
  •     लंबित पड़े सभी शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे सार्वजनिक किया जाए।
  •     लेट-लतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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