जमशेदपुर,वीरेंद्र ओझा। झारखंड का सबसे बड़ा और जमशेदपुर की पहचान बन चुका जुबिली पार्क बारिश के पानी से सालोभर आबाद रहता है। करीब 500 एकड़ में फैले इस पार्क के लगभग आधे हिस्से में नायाब फूलों की छटा इसी वजह से गर्मी में भी बनी रहती है।

दरअसल, टाटा स्टील की सहयोगी इकाई जुस्को (जमशेदपुर यूटिलिटीज एंड सर्विसेज कंपनी लिमिटेड) ने पार्क के कोने में एक रेनवाटर रिजर्वायर व रिचार्ज सिस्टम बना रखा है। इसमें हर साल लगभग 64,825 घन मीटर बारिश का पानी जमा होता है। रिजर्वायर का अतिरिक्त पानी धरती में जाता है, जबकि शेष पानी से गर्मी के दिनों में फूल के पौधों की सिंचाई होती है। इसके लिए स्प्रिंक्लर सिस्टम लगाया जाता है, ताकि कम से कम पानी में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र की सिंचाई हो सके। 

गेट पर नहीं होता जलजमाव

यह सिस्टम ऐसे स्थान पर बनाया गया है, जहां बारिश के दिनों में पार्क के आधे हिस्से का पानी जमा हो जाता था। इससे पार्क के बीचों-बीच बनी सड़क से गुजरने वालों को भी परेशानी होती थी। पानी की बर्बादी अलग थी। जब से यह सिस्टम बना है, तब से पार्क के बिष्टुपुर गेट पर जलजमाव भी नहीं होता।

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था पार्क का उद्घाटन

टाटा स्टील की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर जुबिली पार्क का निर्माण यादगार के रूप में किया गया था। इसका उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने 1958 में किया था, जबकि इसका निर्माण 1937 से जीएस क्रुम्बिगेल व बीएस निर्दय की देखरेख में शुरू हुआ था। इन दोनों की देखरेख में ही मैसूर और राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डेन का निर्माण हुआ था।

जलजमाव को देखकर बनाया गया था सिस्टम

जुस्को ने वर्ष 2013 में जल जमाव को देखकर ही यह सिस्टम बनाया था। यह जुस्को का पहला रेनवार्टिंग हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट था। इसके बाद जुस्को ने दर्जनों सिस्टम बनाए हैं।

- सुकन्या दास, हेड, कारपोरेट कम्युनिकेशन, जुस्को। 

ये भी जाने

  • पार्क के कोने में बना है रिजर्वायर और रेनवाटर रिचार्ज सिस्टम
  • करीब 500 एकड़ में फैले इस पार्क के पेड़-पौधों की संग्रहित जल से होती है सिंचाई
  • हर साल लगभग 64,825 घन मीटर जमा होता है बारिश का पानी

 

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Posted By: Rakesh Ranjan

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