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पेपर लीक संगठित अपराध, रसूखदारों को मिल रहा संरक्षण: NEET रद होने पर झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा हमला

By Ch Venkatesh RaoEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Tue, 19 May 2026 02:24 PM (IST)

झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिनेश कुमार षड़ंगी ने नीट परीक्षा रद्द होने को परीक्षा तंत्र और केंद्र सरकार ...और पढ़ें

डॉ. दिनेश कुमार षड़ंगी़, पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री झारखंड

डॉ. दिनेश कुमार षड़ंगी़, पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री झारखंड

HighLights

  1. नीट पेपर लीक परीक्षा तंत्र, केंद्र सरकार की विफलता।

  2. शिक्षा मंत्री को हटाने, NTA भंग करने की मांग।

  3. छात्रों को 12 हजार करोड़ का आर्थिक, मानसिक नुकसान।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली नीट (NEET) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण इसे रद किया जाना सीधे तौर पर परीक्षा तंत्र और केंद्र सरकार की विफलता को दर्शाता है। यह तीखी प्रतिक्रिया झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और बहरागोड़ा के पूर्व विधायक डॉ. दिनेश कुमार षड़ंगी ने व्यक्त की है। 

उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में शामिल होने वाले देश के करीब 23 लाख छात्रों के महीनों के कड़े परिश्रम और उम्मीदों पर पानी फिर गया है। डॉ. षड़ंगी ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि साल 2024 में भी इसी तरह पेपर लीक की घटना हुई थी, लेकिन उसके दोषियों का आज तक क्या हुआ?
 
सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने में पूरा साल लग जाता है, जिससे आरोपियों को आसानी से कोर्ट से जमानत मिल जाती है। उन्होंने इसे एक बेहद संगठित अपराध करार दिया, जिसमें पैसा, पावर और विभिन्न प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े रसूखदार लोग शामिल हैं। 
 

शिक्षा मंत्री को कैबिनेट से हटाने और NTA को भंग करने की मांग

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि अगर वे अपनी सरकार की विश्वसनीयता और नैतिक जिम्मेदारी को बरकरार रखना चाहते हैं, तो उन्हें तुरंत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। 
 
साथ ही, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल भंग कर इसके दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने विकल्प के तौर पर सुझाव दिया कि या तो यूपीएससी (UPSC) को नीट आयोजित करने की जिम्मेदारी दी जाए, या फिर इसका विकेंद्रीकरण कर इसे राज्य स्तर पर आयोजित कराया जाए।
 

छात्रों के डूबे 12 हजार करोड़, मानसिक प्रताड़ना का भी जिक्र

डॉ. षड़ंगी ने परीक्षा रद्द होने से छात्रों को होने वाले आर्थिक और मानसिक नुकसान का पूरा गणित सामने रखा। उन्होंने कहा:

  •     आर्थिक नुकसान: परीक्षा की तैयारी, कोचिंग, फॉर्म, यात्रा और ठहरने आदि में प्रति छात्र कम से कम 50 हजार रुपये का खर्च आता है। इस लिहाज से देश के 23 लाख छात्रों के कुल 12 हजार करोड़ रुपये पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।
  •     मानसिक प्रताड़ना: इस विफलता का मनोवैज्ञानिक असर बेहद घातक है। छात्र और उनके परिवार इस कदर मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं कि कई बार युवाओं में आत्महत्या तक की नौबत आ जाती है।
 
बयान के अंत में उन्होंने पीएमओ (PMO) पर निशाना साधते हुए कहा कि आज केंद्र सरकार में अधिकतर मामलों में अंतिम निर्णय केवल पीएमओ का विशेषाधिकार बनकर रह गया है। अधिकांश मंत्री स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं और वे सिर्फ आदेशपाल के रूप में काम कर रहे हैं।