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झारखंड सरकार की नई पहल: प्रज्ञा केंद्रों से होगी ऑनलाइन कॉलेज पढ़ाई, शुरू होंगे कई इनोवेटिव कोर्स

Published: Sat, 31 Oct 2026 09:51 PM (IST)

झारखंड सरकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल कर रही है, ताकि छात्रों को ...और पढ़ें

झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे।

झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे।

HighLights

  1. प्रज्ञा केंद्रों से पंचायतों में ऑनलाइन कॉलेज पढ़ाई की सुविधा।

  2. नई शिक्षा नीति के तहत ड्यूल एजुकेशन, अप्रेंटिसशिप-युक्त डिग्री।

  3. रिसर्च पार्क और ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू।

जासं, जमशेदपुर। झारखंड में अब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। 
 
राज्य सरकार अभिभावकों और छात्रों में यह विश्वास जगाने के लिए लगातार प्रयासरत है कि भुवनेश्वर, बेंगलुरु और विशाखापट्टनम जैसे शहरों के समान बेहतर शिक्षा अब झारखंड में ही उपलब्ध है। 
 
यह बात झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने जमशेदपुर में आयोजित नाम्या फाउंडेशन के एक कार्यक्रम के दौरान कही।
 

प्रज्ञा केंद्रों के माध्यम से पंचायतों में ज्ञान केंद्र 

प्रधान सचिव ने बताया कि सरकार जल्द ही राज्य की सभी पंचायतों को 'ज्ञान केंद्र' के रूप में जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। 
 
इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थी अपने नजदीकी पंचायत भवन या प्रज्ञा केंद्र के माध्यम से राज्य के किसी भी तकनीकी कॉलेज के लर्निंग प्रोग्राम में इनरोल होकर ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। 
 
इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को हर दिन दूर-दराज के कॉलेजों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
 

ड्यूल एजुकेशन और अप्रेंटिसशिप-युक्त डिग्री कार्यक्रम 

राज्य सरकार नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अप्रेंटिसशिप-युक्त डिग्री/डिप्लोमा कार्यक्रम (AEDP) पर भी तेज़ी से काम कर रही है। 
 
अमेरिका की तर्ज पर 'ड्यूल एजुकेशन' मॉडल लागू किया जा रहा है, जिससे छात्र अपनी मुख्य पढ़ाई के साथ-साथ किसी अन्य विधा में भी कोर्स कर सकेंगे। 
 
इसके अलावा, नई नीति के तहत यदि किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छूट जाती है, तो छात्र 7 वर्षों के भीतर उसे दोबारा पूरा कर सकेंगे। 
 
अब 4 वर्षीय डिग्री कोर्स में 3 साल सैद्धांतिक (किताबी) ज्ञान और 1 साल का औद्योगिक प्रशिक्षण (इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग) अनिवार्य रूप से शामिल होगा।
 

रिसर्च पार्क और ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप 

उच्च शिक्षा सचिव ने जानकारी दी कि राज्य में एक आधुनिक 'रिसर्च पार्क' का निर्माण किया गया है, जिसमें एक ही छत के नीचे 6 एक्सीलेंस सेंटर संचालित होंगे। यहाँ शिक्षण संस्थान, एनजीओ और औद्योगिक कंपनियाँ एक साथ मिलकर काम कर सकेंगी।
 
इसके साथ ही, 'झारखंड ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप प्रोग्राम' की शुरुआत की जा रही है। इस वर्ष स्कूली बच्चे राज्य की 676 पंचायतों में 8 सप्ताह का अध्ययन करेंगे। 
 
वे ग्रामीण जीवन, समस्याओं, पारंपरिक संस्कृति, हस्तकला और जड़ी-बूटियों पर शोध कर दस्तावेज तैयार करेंगे। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को ग्रामीण समस्याओं के समाधान हेतु नए स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करना है। 
 
इस कार्यक्रम में बच्चों और उनके मेंटोर को स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'गुरुजी क्रेडिट कार्ड', 'ज्ञान ज्योति' और 'मानकी मुंडा' जैसी सरकारी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में संबल प्रदान कर रही हैं।

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