धोनी के बाद भारतीय क्रिकेट का नया पावरहाउस बना झारखंड, दलीप ट्रॉफी में 5 खिलाड़ियों का जलवा
झारखंड भारतीय क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी के बाद युवा प्रतिभाओं का नया केंद्र बन गया है, जहां दलीप ट्रॉफी ...और पढ़ें


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जितेंद्र सिंह, जमशेदपुर। भारतीय क्रिकेट को महेंद्र सिंह धोनी जैसा दिग्गज कप्तान देने वाला झारखंड अब एकल सितारे की छाया से बाहर निकलकर देश में युवा प्रतिभाओं की मजबूत पौध तैयार करने वाला नया केंद्र बन गया है। दलीप ट्रॉफी की चैंपियन पूर्वी क्षेत्र टीम में राज्य के पांच खिलाड़ियों के चयन ने राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड क्रिकेट की बढ़ती गहराई को साबित कर दिया है।
दक्षिण जोन के खिलाफ दलीप ट्रॉफी मुकाबले के दौरान पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता श्रीधरन शरत ने भी माना कि झारखंड से असाधारण तकनीक और जुझारूपन वाले युवा क्रिकेटर तेजी से मुख्यधारा में दस्तक दे रहे हैं।
दलीप ट्रॉफी में युवाओं का दमदार प्रदर्शन
पूर्वी क्षेत्र टीम की कमान भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन संभाल रहे हैं, जबकि दल में अनुभवी बल्लेबाज विराट सिंह, आलराउंडर अनुकूल राय तथा दो उभरते 21 वर्षीय युवा सितारे कुमार कुशाग्र और शिखर मोहन को जगह दी गई है।
चयनकर्ताओं के अनुसार युवा बल्लेबाज शरणदीप भी टीम में स्थान बनाने के बेहद करीब थे। महज 18 वर्ष की उम्र में पदार्पण करने वाले कुमार कुशाग्र अब तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 2,000 से अधिक रन और छह शतक बना चुके हैं। उन्होंने झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्राफी जिताने में 60.28 की औसत से 422 रन बनाकर ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
वहीं, घरेलू सत्र में 55 की औसत और दो शतकों के साथ चमकने वाले शिखर मोहन ने दलीप ट्राफी में 120 गेंदों पर 85 रनों की अनुशासित पारी खेली, जबकि अनुकूल रॉय ने क्वार्टर फाइनल में घातक गेंदबाजी करते हुए 37 रन देकर पांच विकेट चटकाए।
घरेलू ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव
खिलाड़ियों के इस तकनीकी निखार के पीछे झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (जेएससीए) के सचिव सौरभ तिवारी और संयुक्त सचिव शाहबाज नदीम द्वारा किए गए बुनियादी संरचनात्मक सुधार हैं। अपने 25 वर्षों के घरेलू क्रिकेट अनुभव का हवाला देते हुए सौरभ तिवारी ने बताया कि जूनियर क्रिकेट को सीमित ओवरों के ढर्रे से बाहर निकाला गया है।
अब जूनियर स्तर पर लीग मैचों को दो दिवसीय, नाआउट को तीन दिवसीय और फाइनल को चार दिवसीय कर दिया गया है। संघ का स्पष्ट मानना है कि शार्ट फार्मेट की जल्दबाजी के बजाय जब खिलाड़ी लंबी अवधि के प्रारूप में मजबूत तकनीक सीखेंगे, तभी वे शतक, दोहरा शतक और तिहरा शतक लगाने की आदत विकसित कर पाएंगे।
क्रीज पर टिकने और बड़े शतक की संस्कृति
पूर्वी क्षेत्र के कप्तान ईशान किशन ने भी टीम में बड़ा स्कोर खड़ा करने की मानसिकता विकसित करने पर बल दिया है। उनका कहना है कि 70 या 80 रन के स्कोर पर आउट होने के बजाय उसे बड़े शतक में तब्दील करना एक आदत है, जिसे नए खिलाड़ियों के भीतर रोपा जा रहा है।
वहीं झारखंड अंडर-23 टीम के कोच इशांक जग्गी ने बताया कि पुडुचेरी में अभ्यास मैचों के माध्यम से युवा बल्लेबाजों को क्रीज पर घंटों डटे रहने और परिस्थितियों के अनुसार खेल ढालने का अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि वे लाल गेंद के प्रारूप में लंबी पारियों के अभ्यस्त हो सकें।
चार जोनों में खुलेंगी नई अकादमियां
राज्य में खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जेएससीए अब केवल रांची के अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम तक सीमित नहीं रहेगा।
संघ राज्य के चारों जोनों में एक-एक आधुनिक क्रिकेट अकादमी स्थापित करने जा रहा है। इससे दूर-दराज के जिलों के प्रतिभावान युवा खिलाड़ियों और महिला क्रिकेटरों को उच्चस्तरीय अभ्यास के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
