जमशेदपुर, वीरेंद्र ओझा। Jharkhand Assembly Election 2019 चुनाव चीज ही ऐसी है। कई चीजें ऐसी हो जाती हैं, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। पता चलता है कि पांच साल से जिस मुद्दे को आप पकाकर खाना चाहते थे, वह अंतिम समय में आंख के सामने से गायब हो गई। ऐसा ही इन दिनों एक मुद्दा चर्चा में है।

एक प्रत्याशी को ऐसा चुनाव चिह्न मिल गया है, जिसे दूसरा प्रत्याशी चुनाव में भुनाने की तैयारी में था। सोचा था कि चुनाव में ऑटोमेटिक इग्निशन स्विच लग जाएगा। देखते ही देखते रोटी क्या पराठा भी सेंक लेंगे। अब यह दूसरे की झोली में चला गया है। वह इसे पाकर इतराता हुआ घूम रहा है, जिसे देखकर सामने वाला जल-भुनकर खाक हुआ जा रहा है। बताते हैं कि सामने वाले ने फरमान जारी कर दिया है कि उनका कोई आदमी इसका नाम भी लिया तो खैर नहीं होगी। रोटी सेंकने की बात सोचना तक गुनाह होगा। राजा का हुक्म है तो मानना ही पड़ेगा। चेले अब इसे अपने-अपने घर में भी चादर-कपड़े से ढंककर रख रहे हैं। कहीं साहब की नजर पड़ गई, तो कहीं के नहीं रहेंगे। वहीं दूसरा तो इसे बांस पर टांगकर घूम रहा है, क्योंकि उसे बैठे-बिठाए मन की मुराद मिल गई। अब उस पर तरह-तरह के जुमले भी सेकें जा रहे हैं। 

साहब उत्साह में फंस गए

एक साहब हैं, जो नौकरी कहीं और करते हैं और रहते यहां हैं। हालांकि इसमें कोई नई बात नहीं है। यहां कई ऐसे अधिकारी भी रहते हैं, जो प्रदेश के किसी कोने में नौकरी करते हैं। एकाध तो दूसरे राज्यों में भी रहते हैं। बहरहाल साहब गुलाबी नशे से तरबतर रहते हैं। उनके नशे का खुमार इस चुनाव में इस कदर चढ़कर बोला कि अब नौकरी से भी हाथ धोने की नौबत आ गई। जनाब को किसी ने समझाया भी था कि आप अपनी बालकनी से भी इशारा कर सकते हैं। बाहर घूमने की क्या जरूरत थी। कोई जीते या हारे, आपका प्रमोशन थोड़े हो जाएगा? नौकरी बचेगी तो बाद में आप भी चुनाव लड़ लीजिएगा, लेकिन साहब नहीं माने। विनाश काले विपरीत बुद्धि। किसी ने फोटो खींचकर चुगली कर दी। अब बेचारे माथा पीट रहे हैं। 

Posted By: Rakesh Ranjan

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस