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जमशेदपुर में 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होगा 13 दिनों का उत्सवी कारवां, 16 को छठ महापर्व के साथ होगा समापन

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:06 PM (IST)

जमशेदपुर में 6 नवंबर को धनतेरस से 16 नवंबर को छठ महापर्व तक 13 दिवसीय उत्सवी कारवां शुरू हो रहा ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। (AI Generated Image)

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। (AI Generated Image)

HighLights

  1. धनतेरस से छठ तक 13 दिवसीय उत्सव का आयोजन।

  2. दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज भी मनाए जाएंगे।

  3. जमशेदपुर में लोक आस्था और भक्ति का संगम।

जासं, जमशेदपुर। कार्तिक मास की सिंदूरी शामों के बीच लौहनगरी अगले 13 दिनों तक लोक आस्था, दीपों के उल्लास और सात्विक भक्ति के आलौकिक रंग में डूबने जा रही है। 
 
छह नवंबर को धनतेरस के शंखनाद से शुरू हो रहा यह पावन उत्सवी कारवां 16 नवंबर को लोक आस्था के महापर्व छठ के प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ पूर्ण होगा। 
 
छोटा गोविंदपुर स्थित श्रीराम मंदिर के पुरोहित पंडित देवानंद पांडेय के अनुसार, इस पूरे पखवाड़े में सनातन परंपरा के प्रमुख पर्व-त्योहारों का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे घर-आंगन से लेकर बाजार तक उत्सव का उल्लास बिखरेगा।
 

6 नवंबर: धनतेरस (धन त्रयोदशी) 

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी तिथि को समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। 
 
इस दिन आरोग्यता के लिए भगवान धन्वंतरि और समृद्धि के लिए धन के अधिपति कुबेर की आराधना की जाती है। इस दिन सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, पीतल के बर्तन, बही-खाते और झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष काल में अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख कर यमराज के निमित्त यम-दीपदान किया जाएगा।
 

7 नवंबर: नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) 

शनिवार, 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) मनेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अत्याचारी असुर नरकासुर का वध कर 16 हजार कन्याओं को कारागार से मुक्त कराया था। 
 
इस दिन भोर में तिल के तेल और उबटन से स्नान कर अपामार्ग (चिरचिरी) घुमाने से आरोग्यता और सौंदर्य की प्राप्ति होती है। 
 
शाम ढलते ही घर की देहरी पर 14 अखंड दीप जलाकर यमराज को नमन किया जाएगा। इसी रात्रि मां काली के पूजन का भी विशेष विधान है।
 

8 नवंबर: दीपावली (लक्ष्मी-गणेश वंदन) 

कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर, रविवार को तिमिर पर प्रकाश की विजय का महापर्व दीपावली श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाएगा। 
 
श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या आगमन की स्मृति में मिट्टी के दीयों से पूरी लौहनगरी जगमगाएगी। जमशेदपुर में इस दिन तीन स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन का विशेष योग बन रहा है:
 
स्थिर कुंभ लग्न (व्यावसायिक प्रतिष्ठान): दोपहर 1:00 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक। दुकान, शोरूम व कारखानों में खाता-बही पूजन और कुबेर-लक्ष्मी आराधना के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
 
प्रदोष काल व स्थिर वृषभ लग्न (गृहस्थ पूजन): शाम 5:37 बजे से शाम 7:34 बजे तक। इस काल में माता लक्ष्मी का घर में वास माना जाता है।
 
स्थिर सिंह लग्न (निशीथ व महानिशीथ काल): मध्य रात्रि 12:05 बजे से 2:19 बजे तक। साधकों और व्यापारियों के लिए यह लग्न अक्षय फलदायी है।
 

10 नवंबर: गोवर्धन पूजा, भैया दूज और चित्रगुप्त वंदन 

दीपावली के बाद मंगलवार, 10 नवंबर को तीन विशिष्ट पर्वों का अद्भुत त्रिवेणी संगम होगा:
 
  • गोवर्धन पूजा (अन्नकूट): गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजन किया जाएगा। गोवंश का श्रृंगार व वंदन होगा और 56 भोग का प्रसाद वितरित किया जाएगा। 
  • भैया दूज (यम द्वितीया): बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। 
  • चित्रगुप्त पूजा: कलम, दवात और बही-खातों के संरक्षक भगवान चित्रगुप्त का पूजन होगा। कायस्थ समाज व व्यापारिक वर्ग अपने नए खातों का शुभारंभ करेंगे।
 

13 से 16 नवंबर: प्रकृति और सूर्य उपासना का महापर्व छठ 

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक चलने वाला चार दिवसीय सूर्य षष्ठी महापर्व स्वच्छता, सादगी और कठिन साधना का अनुपम उदाहरण है। स्वर्णरेखा व खरकई नदी के घाटों समेत शहर के तमाम सूर्य सरोवरों पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा: 
  • 13 नवंबर (शुक्रवार) - नहाय-खाय: व्रती शुद्ध जल से स्नान कर कद्दू-भात और चने की दाल का प्रसाद ग्रहण कर चार दिवसीय संयम का संकल्प लेंगे। 
  • 14 नवंबर (शनिवार) - खरना: शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़, आम की लकड़ी और नए चावल से बनी रसियाव-रोटी का भोग छठी मइया को अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला अनुष्ठान शुरू होगा। 
  • 15 नवंबर (रविवार) - संध्या अर्घ्य: अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती कमर तक शीतल जल में खड़े होकर आराधना करेंगे। 
  • 16 नवंबर (सोमवार) - उषा अर्घ्य व पारण: सुबह करीब 6:00 बजे उदीयमान भुवन भास्कर को दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के साथ व्रत पूर्ण होगा। व्रती जल पीकर पारण करेंगे और ठेकुआ का प्रसाद वितरित किया जाएगा।

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