'सुरक्षा के बदले दरिंंदगी...': सरायकेला खरसावां जिले में पति के डर से न्याय मांगने थाने गई पीड़िता; खाकी ने लूटी आबरू
पति से विवाद के बाद न्याय मांगने थाने पहुंची एक महिला के साथ ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने दुष्कर्म किया। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)
HighLights
पति से विवाद के बाद महिला पहुंची गम्हरिया थाना।
ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने किया महिला से दुष्कर्म।
पुलिस पर मामले को दबाने का लगा गंभीर आरोप।
जासं, जमशेदपुर । शुक्रवार की शाम खाना बनाते समय सब्जी में थोड़ा ज्यादा नमक क्या पड़ गया, पति आगबबूला हो गए। वे गालियां देते हुए जान से मारने और काट डालने की धमकी देने लगे।
मैं बुरी तरह डर गई। उसी खौफ में जान बचाने और इंसाफ मांगने थाने पहुंची थी, लेकिन वहां तैनात सिपाही ने मेरी आबरू ही लूट ली।
चेहरे पर दुपट्टा बांधे और खून से सने सफेद कुर्ते को हाथों में थामे यह रूह कंपा देने वाली आपबीती गम्हरिया थाना क्षेत्र के दुग्धा गांव की उस पीड़िता ने बयां की, जो न्याय की उम्मीद लेकर कानून के दरवाजे पर गई थी और खाकी की दरिंदगी का शिकार बन गई।
सब्जी में नमक से शुरू हुआ विवाद
पीड़िता ने घटना की शुरुआत के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि शुक्रवार की शाम उसने घर में खाना बनाया था। सब्जी में नमक कुछ तेज हो गया।
इसी बात पर पति भड़क उठे और झगड़ा करने लगे। बात इतनी बढ़ गई कि पति ने सीधे जान से मारने की धमकी दे डाली। महिला के अनुसार, पति ने कहा कि मार देंगे, खत्म कर देंगे।
मैं बहुत ज्यादा डर गई। इसके बाद पति उसे बहलाने और घुमाने के बहाने गम्हरिया बाजार ले गया। बाजार में उसने मोमोज भी खाए, लेकिन पति की धमकियां उसके जेहन में गूंज रही थीं। बाजार में मौका पाते ही वह पति के चंगुल से बचकर भाग निकली।
बारिश में भीगते हुए मांगी पनाह
बाजार से भागने के दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। पूरी तरह भीगी और बदहवास हालत में वह रेलवे लाइन के पास एक दुकान सह मकान में पहुंची।
वहां मौजूद महिला से उसने रोते हुए कहा, दीदी, मुझे बचाइए, मेरा पति मुझे मार डालेगा। उस महिला ने स्थिति देखकर तुरंत गम्हरिया थाने को फोन किया। रात करीब 11 बजे पुलिस की पीसीआर वैन आई और महिला को थाने ले गई।
''रात बहुत हो गई है, सुबह देखेंगे'' कहकर कमरे में सुलाया
थाने में पुलिस पदाधिकारियों ने पूरी बात सुनी। पीड़िता ने विनती की कि उसे उसके मायके भेज दिया जाए। इस पर पुलिसकर्मियों ने कहा कि रात के 12 बज चुके हैं, इतनी देर रात कहीं जाना सुरक्षित नहीं है।
सुबह उसका मामला देख लिया जाएगा। ठंड से कांप रही महिला ने ओढ़ने के लिए चादर मांगी। इसके बाद उसे थाना परिसर के एक कमरे में सोने के लिए भेज दिया गया।
कमरा अंदर से बंद कर की हैवानियत, आत्मरक्षा में सिपाही का कटा हाथ
पीड़िता के मुताबिक, देर रात ड्यूटी पर तैनात सिपाही नीरज लकड़ा कमरे में दाखिल हुआ। उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और महिला के साथ छेड़छाड़ व जबरदस्ती करने लगा।
पीड़िता ने हाथ जोड़कर मिन्नतें कीं, 'ऐसा मत कीजिए, मैं चिल्लाऊंगी।' लेकिन सिपाही नहीं माना। घबराहट और आत्मरक्षा में महिला ने पास रखी सब्जी काटने वाली छुरी उठा ली।
छीना-झपटी के दौरान छुरी से सिपाही का हाथ कट गया। सिपाही के हाथ से निकला खून महिला के सफेद कुर्ते, बिस्तर और कमरे के फर्श पर फैल गया।
इसके बावजूद सिपाही ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में दर्द से कराहते हुए बाहर निकल गया।
सुबह 700 रुपये थमाकर आटो से थाने से निकाला
पीड़िता पूरी रात कमरे में रोती रही। सुबह करीब छह बजे जब अन्य पुलिसकर्मी आए, तो पीड़िता ने रो-रोकर पूरी दास्तान बताई और खून से सने कपड़े दिखाए।
आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की। महिला के हाथ में करीब 700 रुपये थमाए गए और कहा गया कि नए कपड़े खरीद लेना और चुपचाप अपने घर लौट जाना।
इसके बाद उसे आटो में बैठाकर स्टेशन की ओर भेज दिया गया। खून के गहरे धब्बों से सने अपने कुर्ते को दिखाते हुए पीड़िता ने सिसकते हुए इंसाफ की गुहार लगाई।
उसने कहा, रक्षक थाने के भीतर फरियादी की इज्जत लूट ले, उसे पुलिस में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उस सिपाही को बर्खास्त कर फांसी की सजा दी जाए।
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