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Voter ID वेरिफिकेशन के नाम पर खतरनाक ठगी: फिशिंग लिंक क्लिक करते ही क्लोन हो रहा फोन और लैपटॉप का डेटा

Published: Tue, 03 Nov 2026 09:25 PM (IST)

साइबर अपराधी जमशेदपुर में मतदाताओं को फर्जी निर्वाचन आयोग नोटिस भेजकर ठगी कर रहे हैं। फिशिंग लिंक पर क्लिक करने ...और पढ़ें

संभ्रांत इलाकों में रहने वाले मतदाताओं के इनबॉक्स में निर्वाचन आयोग के हूबहू प्रारूप वाले फर्जी नोटिस भेजे जा रहे हैं।

संभ्रांत इलाकों में रहने वाले मतदाताओं के इनबॉक्स में निर्वाचन आयोग के हूबहू प्रारूप वाले फर्जी नोटिस भेजे जा रहे हैं।

HighLights

  1. जमशेदपुर में फर्जी वोटर आईडी वेरिफिकेशन घोटाला सामने आया।

  2. फिशिंग लिंक से नागरिकों का संवेदनशील डेटा चोरी हो रहा है।

  3. निर्वाचन आयोग ने ऐसे ईमेल से सावधान रहने की अपील की।

जासं, जमशेदपुर। लॉटरी, बिजली बिल और डिजिटल अरेस्ट के बाद अब साइबर अपराधियों ने ठगी और ब्लैकमेलिंग के लिए नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को नया हथियार बना लिया है। 
 
शहर के संभ्रांत इलाकों में रहने वाले मतदाताओं के इनबॉक्स में निर्वाचन आयोग के हूबहू प्रारूप वाले फर्जी नोटिस भेजे जा रहे हैं। 

'वोटर लिस्ट से आपका नाम कट गया है'- इस एक वाक्य का मनोवैज्ञानिक खौफ पैदा कर लोगों को फिशिंग लिंक पर क्लिक करने के लिए विवश किया जा रहा है। 
 
जमशेदपुर पश्चिम के कदमा और सोनारी इलाके में टाटा स्टील कर्मियों व नामचीन डॉक्टरों से जुड़ी ऐसी 20 शिकायतें सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
 

क्या है साइबर अपराधियों का पूरा चक्रव्यूह? 

इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर है। जालसाज सबसे पहले 'एक्शन रिक्वायर्ड: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से आपका नाम हटा दिया गया है' शीर्षक से आधिकारिक दिखने वाला ई-मेल भेजते हैं। 
 
इसमें दावा किया जाता है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के दौरान विसंगति मिलने के कारण नाम हटा दिया गया है। नाम बहाल करने के नाम पर वे एक 'SIR वेरिफिकेशन फॉर्म' का फिशिंग लिंक देते हैं, जो बिल्कुल निर्वाचन आयोग की अधिकृत वेबसाइट जैसा नजर आता है।
 
जैसे ही कोई पीड़ित इस लिंक को खोलता है, उससे आधार, पैन, बैंक विवरण और अन्य संवेदनशील दस्तावेज मांगे जाते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही सिस्टम में जासूसी मालवेयर (Malware) सक्रिय हो जाता है, जो मोबाइल और लैपटॉप का पूरा डेटा जालसाजों के सर्वर पर क्लोन कर लेता है। 
 
इसके बाद पीड़ितों को भारी वित्तीय चपत लगाने और उनके निजी डेटा के सहारे ब्लैकमेल करने का खेल शुरू होता है।
 

एसएसपी और साइबर सेल को लिखा गया पत्र 

मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। उप जिला निर्वाचन पदाधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि फर्जी ई-मेल की अधिकांश शिकायतें सोनारी और कदमा क्षेत्रों से मिली हैं। 
 
हालांकि, राहत की बात यह है कि शनिवार के बाद से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग कभी भी ई-मेल के जरिए दस्तावेज, पासवर्ड या ओटीपी की मांग नहीं करता है। 
 

बीएलओ की सतर्कता से टला बड़ा खतरा 

इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच के लिए पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी और साइबर सुरक्षा सेल को पत्र लिखा गया है। गनीमत यह रही कि कुछ जागरूक नागरिकों ने हड़बड़ी में अनजान लिंक पर क्लिक करने के बजाय सीधे अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क किया। 
 
जिससे इस बड़े षड्यंत्र का समय रहते पर्दाफाश हो गया। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से अपील की है कि मतदाता किसी भी अनजान ई-मेल या लिंक पर भरोसा न करें। 
 
मतदाता सूची में नाम देखने या संशोधन के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल (voters.eci.gov.in) अथवा अपने क्षेत्र के बीएलओ की ही मदद लें।

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