जमशेदपुर : कोरोना काल में जब नौकरियां छूट रही थीं, बेरोजगारी बढ़ने का रोना रोया जा रहा था, केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत रोजगार अभियान’ नामक योजना शुरू की थी। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में भी कुछ लोगों ने ठगी का माध्यम बना लिया। ऐसा ही एक मामला जमशेदपुर के भविष्य निधि कार्यालय में सामने आया है, जिसमें करीब एक करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।

इसमें जमशेदपुर निवासी प्रसेनजीत घोष ने अपने पत्नी, भाई, साला, सास आदि परिवार के सदस्यों के नाम से 11 फर्जी (शेल) कंपनी खोल ली। दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक लागू इस योजना में यह प्रविधान था कि इस अवधि में जो भी नए कर्मचारी भविष्य निधि विभाग से जुड़ेंगे, उन्हें कर्मचारी और कंपनी या नियोक्ता, दोनों की राशि केंद्र सरकार भुगतान करेगी। प्रसेनजीत घोष ने मनरेगा मजदूरों को इस शर्त के साथ उनका आधार कार्ड व बैंक खाता लिया कि भविष्य निधि विभाग से जो भी राशि आएगी, उसकी 60 प्रतिशत उसे देनी होगी। बिना कुछ किए रुपये मिलने के लालच में मजदूर तैयार हो गए। इसके बाद करीब 400 मनरेगा मजदूरों का आधार कार्ड व बैंक खाता दिखाकर उन्हें अपनी शेल कंपनियों का कर्मचारी बना दिया। इनका वेतन 15,000 रुपये के आसपास ही रखा गया। इससे हर कर्मचारी के खाते में 12-12 प्रतिशत अंशदान जमा होता था। इस तरह से एक कर्मचारी के खाते में लगभग 3500 रुपये प्रतिमाह जमा हो रहे थे।

प्रसेनजीत घोष उसमें से 60 प्रतिशत राशि उनसे नकद ले लेता था। इस योजना में एक और प्रविधान था कि हर नए कर्मचारी को दो वर्ष तक योजना का लाभ मिलेगा। इस हिसाब से मार्च 2021 में भी जो कर्मचारी भविष्य निधि विभाग से जुड़ा था, उसे इस योजना के तहत मार्च 2023 तक लाभ मिलता। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त, जमशेदपुर ने बताया कि मामला सामने आते ही सभी 11 शेल कंपनियों सहित सभी 400 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। मुख्यालय को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। इस तरह के मामले गुंटूर (आंध्रप्रदेश) व पुणे (महाराष्ट्र) समेत अन्य शहरों में भी मिले हैं।

Edited By: Sanam Singh