जमशेदपुर के MGM अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच झूल रही मां और तीन बेटियां, 'पाराक्वेट' जहर पीने से हालत नाजुक
जमशेदपुर में एक मां और उसकी तीन बेटियों ने जहरीला रसायन 'पाराक्वेट' पीकर जान देने की कोशिश की, जिससे उनकी ...और पढ़ें

HighLights
मां और तीन बेटियों ने पिया 'पाराक्वेट' रसायन।
जमशेदपुर एमजीएम अस्पताल में चारों की हालत नाजुक।
इलाज में परिजनों की अनुपस्थिति बन रही बड़ी बाधा।
जासं, जमशेदपुर। मानगो के डिमना रोड स्थित शंकोसाई, केदार बगान इलाके में मंगलवार देर रात एक महिला ने अपनी तीन मासूम बच्चियों के साथ जहरीला रसायन 'पाराक्वेट' पीकर जान देने की कोशिश की।
घटना के सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में चारों को इलाज के लिए महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
मेडिसिन और शिशु रोग विभाग में चल रहा इलाज
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मां का इलाज मेडिसिन वार्ड में चल रहा है, जबकि तीनों बच्चियों को शिशु रोग विभाग (पीडियाट्रिक वार्ड) में रखा गया है।
केमिकल की अत्यधिक विषाक्तता को देखते हुए चिकित्सक हर पल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तीनों मासूमों की सुरक्षा और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केके चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया है।
फेफड़ों और किडनी पर गंभीर असर का खतरा
चिकित्सकों ने बताया कि चारों ने 'पाराक्वेट' नामक रसायन का सेवन किया है, जो आमतौर पर खेती में खरपतवार नाशक (हर्बीसाइड) के रूप में इस्तेमाल होता है।
यह अत्यंत घातक केमिकल है, जो शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों, विशेष रूप से फेफड़ों और किडनी पर सीधा व गंभीर प्रभाव डालता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस रसायन का कोई स्थापित 'एंटीडोट' उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को बचाना डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और सपोटिव केयर ही इलाज का मुख्य सहारा है।
अटेंडर न होने से अस्पताल में बढ़ी परेशानी
इस पूरे घटनाक्रम में डॉक्टरों के सामने एक और बड़ी व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई है। अस्पताल में भर्ती मां और तीनों बच्चियों के साथ कोई भी अटेंडर या परिजन मौजूद नहीं है।
चिकित्सकों का कहना है कि गंभीर स्थिति में आपातकालीन दवाइयां मंगाने, जांच रिपोर्ट लेने और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के लिए किसी जिम्मेदार व्यक्ति का साथ होना बेहद जरूरी होता है।
अटेंडर की गैर-मौजूदगी से इलाज की प्रक्रिया में बाधा आ रही है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और पुलिस अपने स्तर पर परिजनों से संपर्क करने और स्थिति को संभालने का प्रयास कर रही है।