जमशेदपुर, अन्वेष अंबष्ठ। किसी ने ठीक ही कहा है, पुलिस से ना अधिक दाेस्ती ठीक है, और ना दुश्मनी। पुलिस किसी की नहीं होती। मौके की फिराक में रहती है। पटमदा में बच्ची की सड़क दुर्घटना में शनिवार को मौत हो गई थी। ट्रक के चालक की ग्रामीणों ने पेड़ से बांधकर पिटाई कर दी। पुलिसकर्मियों से उलझ गए। हाथापाई कर दी।

चार घंटे तक पुलिस ग्रामीणों से जाम हटाने को मान-मनौव्वल करती रही। जाम हटते ही कानूनी धारा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का इस्तेमाल पुलिस ने भीड़ पर कर दिया। 50 ग्रामीणों पर पटमदा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। पटमदा की तरह पिपला में चार की करंट से मौत के बाद ऐसी ही गलती ग्रामीणों ने करते हुए रविवार को सड़क जाम कर दिया था। 20 के खिलाफ नामजद और 50 पर कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई। अब ग्रामीण परेशान हैं।

एक बार फिर पाला पुलिस के पास, देखिए होता है क्या

प्रदेश के एक मंत्री के निजी चालक रहे मुन्ना सिंह शादी का झांसा देकर नौ साल से शादीशुदा महिला से यौन शोषण करता रहा। रुपये भी ले लिए। उसके चक्कर में महिला ने पति से तलाक भी ले लिया। बाद में चालक शादी से मुकर गया। महिला न्याय की गुहार लेकर डीजीपी से लेकर जिले के एससपी, सिटी एसपी और कदमा थाना तक से पत्राचार किया। किसी ने आरोप पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। महिला को अदालत का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ा। आरोपित के खिलाफ शिकायतवाद दाखिल किया। न्यायालय के आदेश पर कदमा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। जांच मुख्यालय-एक के डीएसपी करेंगे। सो पाला एक बार फिर पुलिस के हाथ में है। शुरुआत में महिला की नहीं सुनने वाली पुलिस से कितना न्याय मिलेगा। यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल आरोपित मजे में घूम रहा है।

सरकारी जमीन पर कब्जा करो मजे में

शहर में सरकारी जमीन पर कब्जा और उसके खरीद-बिक्री का खेल जारी है। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। बस सेटिंग-गेटिंग ठीक रहनी चाहिए। कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सुंदरनगर और बिरसानगर इलाके में सुनियोजित रूप से जमीन पर कब्जा किए जा रहे हैं। रातों-रात घेराबंदी कर मकान का ढांचा खड़ा कर दिया जा रहा है। पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जब स्थानीय लोग शिकायत करते हैं, तब अंचल कर्मचारी जागते हैं। सरकारी जमीन होने का बोर्ड लगाकर लौट जाते हैं। थाना के अधिकारी का अलग ही फंडा है। जमीन का मामला हमलोग नहीं देखते हैं। कोई लिखित शिकायत करेगा तब न कार्रवाई होगी। पुलिस क्या करे। हमेशा सरकार का आदेश होता है जिस भी थाना इलाका में सरकारी जमीन पर कब्जा होगा, वहां के थानेदार पर कार्रवाई होगी। अगर ऐसा होता तो जमीन पर शायद कब्जा ही नहीं होता।

यूं मामला दबाना अच्छी बात नहीं

परसुडीह के गोलपहाड़ी में अवैध शराब दुकान में शराब पीने से युवक की मौत हो गई। शराब बेचने वालों ने शव को सड़क किनारे रख दिया। लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने हंगामा किया। कार्रवाई की मांग की। शव को पुलिस उठा ले गई। पंचनामा में लिखा गया, अत्यधिक शराब पीने से मौत हो गई। अस्वाभाविक मौत की प्राथमिकी दर्ज की गई। शराब बेचने वाले से कोई पूछताछ नहीं की गई। मामले की सत्यता की जानकारी स्थानीय लोगों से लेना भी उचित नहीं समझा। शराब बेचने वाले ने किसके कहने पर शव को पुलिस के आने के पहले दुकान से बाहर निकाल रख दिया, यह भी जांच का विषय है। शराब पीने से मौत होना पुलिस जब मान रही है तो जिस दुकान में युवक ने शराब सेवन किया, उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही मामला दब गया।

 

Edited By: Rakesh Ranjan