जमशेदपुर : भारतीय रेल लगातार अपने सेवाओं का विस्तार कर रही है। साथ ही उसे आधुनिक भी बना रही है ताकि रेल से सफर करने वाले यात्रियों को कम से कम परेशानी होगी। 

डिजिटलीकरण की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने बायोमेट्रिक टोकन मशीन की सेवा शुरू की है। 14 सितंबर 2021 को पहली बायोमेट्रिक टोकन लगाया गया था। इसकी सफलता के बाद सिकंदराबाद स्टेशन में इसकी दूसरी मशीन भी लगाई गई थी। जल्द ही इस तरह की मशीन को दक्षिण पूर्व रेलवे सहित देश के सभी जोन में लगाया जाएगा। इस तरह की मशीन की मदद से अब यात्रियों को टिकट लेने के लिए काउंटर में लंबी लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार नहीं करना होगा। यात्री अपनी यात्रा के अनुरूप तुरंत इस सुविधा का उपयोग कर अपना समय बचा सकते हैं।

ऐसी करती है ये मशीन काम

नई बायोमेट्रिक टिकट मशीन अनारक्षित श्रेणी के यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो सीधे संबधित स्टेशन के बुकिंग काउंटर से अटैच होगा। अपनी यात्रा का टिकट लेने के लिए संबधित यात्री को अपना नाम, यात्रा की तारीख, गंतव्य से यात्रा करने वाले स्टेशन का पूरा विवरण मशीन में ही भरना होगा।

मशीन के सामने खड़ा होने पर यह संबधित यात्री की फोटो को कैप्चर करेगा। साथ ही संबधित यात्री को अपना पहचान पत्र के रूप में अपना अंगूठा लगाना होगा। जिससे संबधित मशीन उक्त शत्री के फिंगर प्रिंट को भी कैप्चर कर उसे टिकट के रूप में एक टोकन दे देगा। यात्री उक्त टोकन के अनुरूप ट्रेन खुलने से 15 मिनट पहले अपने यात्रा वाले कोच तक पहुंच कर अपने लिए आरक्षित सीट पर जाकर बैठ सकता है।

बायोमेट्रिक टिकट का एक फायदा ये भी

बायोमेट्रिक टिकट मशीन का एक सबसे बड़ा फायदा होगा कि यह मशीन उन अपराधियों को भी ट्रैक करेगी। जो केंद्र व राज्य सरकार के डेटा बेस में अपलोड है। जैसे ही मशीन में संबधित यात्री की तस्वीर व फिंगर प्रिंट कैप्चर होगा। यह संबधित सिस्टम को अलर्ट करेगा। इससे रेलवे को भी किसी तरह की घटना या दुर्घटना के समय पूरा रिकार्ड भी मिलेगा।

Edited By: Jitendra Singh