जमशेदपुर, जितेंद्र सिंह।  Indian goalkeeper Subroto Pal भारतीय गोलकीपर सुब्रतो पाल जब भी मैदान पर उतरते हैैं तो शिन पैड में फैमिली फोटो लगाना नहीं भूलते। बकौल सुब्रतो, इससे मैदान पर बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। भारतीय फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए सुब्रतो ने अबतक 67 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैैं।

फिलहाल इंडियन सुपर लीग में जमशेदपुर एफसी से जुड़े इस खिलाड़ी को एशियाई फुटबॉल की दुनिया में स्पाइडरमैन भी कहा जाता है। वह ईस्ट बंगाल व मोहन बागान जैसी लब्ध-प्रतिष्ठित टीम से लंबे समय तक जुड़े रहे हैैं। दैनिक जागरण से विशेष बातचीत करते हुए सुब्रतो पॉल ने कहा, मेरे लिए जीवन कभी गुलाबों का बिस्तर नहीं रहा, बल्कि सफर कांटों से भरा रहा। और उन कांटों पर चलने के लिए, आपको उन लोगों से समर्थन और आशीर्वाद की आवश्यकता होती है। 

जब न‍िराश होता तो मिलता परिवार का सपोर्ट

इस मामले में मैैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। जब भी मैैं निराश होता हूं, परिवार हमेशा सपोर्ट करता है। मेरी मम्मी, पापा, मेरे ससुर, जो मेरे गाइड और पर्सनल कोच रहे हैं, मेरी बहन, मेरे ससुराल वाले, मेरी पत्नी और फिर मेरा बेटा मेरी प्रेरणा है। मैं बहुत विनम्र पृष्ठभूमि से आता हूं और मुझे हर कदम पर बाधाओं से लडऩा पड़ा है। क्या यह अंधविश्वास है कि आप हर मैच में शिन पैड पर अपने परिवार की फोटो लगाकर उतरते हैैं? उन्होंने कहा कि मैैं ऐसे अंधविश्वास को नहीं मानता। शिन पैड में परिवार की फोटो लगाने से मुझे आत्मिक बल मिलता है। प्रेरणा मिलती है। मुझे हमेशा लगता है कि मैं अपने परिवार के लिए खेल रहा हूं। ऐसा लगता है कि मैैं मैदान पर पाल फैमिली का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। यही कारण है कि मेरे शिन पैड पर उनकी तस्वीरें  होती है। यह मुझे प्रेरित करती हैं और मुझे लगता है कि वे हमेशा मेरे साथ हैं। यही कारण है कि मैं गोलपोस्ट पर अकेले होने के बावजूद गोल बचाने में कामयाब होता हूं। शिन पैड पर मेरी पत्नी देबस्मिता मुखर्जी पाल और मेरा बेटा स्मितोब्रोतो पाल की तस्वीर लगी होती है। 

ईस्‍ट बंगाल की ओर से खेल चुके 31 मैच

ईस्ट बंगाल की ओर से 31 मैच खेल चुके सुब्रतो ने बताया कि परिवार के समर्थन के बिना मेरे लिए पेशेवर खिलाड़ी बनना संभव नहीं था। मेरे परिवार ने मेरे पूरे कॅरियर में हमेशा मेरा साथ दिया। जिंदगी में कई बार ऐसे समय भी आया, जब मैं काफी निराश था। लगा कि कॅरियर अब खत्म हो जाएगा। वैसी परिस्थिति में मेरी मां, पिताजी व बहनों ने पूरा सपोर्ट किया। अब मेरी पत्नी भी मनोबल बढ़ाती है और बेटा मुख्य प्रेरणास्रोत हैं। वे हमेशा मेरे अच्छे और बुरे पलों में साथ होता है। संक्षेप में मेरा परिवार मेरी दुनिया है। मैं अपने परिवार के बिना कुछ भी नहीं हूं। सुब्रतो पाल ने अपने कोच देवाशीष मुखर्जी के बारे में कहा कि आज मैं जो भी हूं, उनकी बदौलत हूं। उन्होंने हमेशा मुझे प्रेरित किया। न सिर्फ मैदान पर बल्कि मैदान से बाहर भी।  

कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास ही आपको दिलाती सफलता 

इंडियन सुपर लीग में जमशेदपुर एफसी का प्रतिनिधित्व कर रहे सुब्रतो पाल ने इस सीजन में शानदार प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाई है। जब उनसे पूछा गया कि आप बेहतर प्रदर्शन की निरंतरता कैसे बनाए रखते हैैं, उन्होंने कहा, फुटबॉल एक पेशेवर काम है। जैसे आप एक पेशेवर पत्रकार हैं, वैसे ही मैं एक पेशेवर फुटबॉलर हूं। और किसी भी पेशेवर को उनकी उपलब्धियों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास ही आपको सफलता दिलाती है। हमेशा व्यक्तिगत लक्ष्यों को निर्धारित करने की आवश्यकता होती है, और लक्ष्यों को बदलने की आवश्यकता भी होती है। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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