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इंकैब इंडस्ट्रीज मामले में NCLAT सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तक टली अपीलकर्ताओं को अंतिम मौका

Published: Sat, 07 Nov 2026 09:06 PM (GMT+05:30)

इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पुनरुद्धार मामले में NCLAT ने सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तक स्थगित कर दी है, क्योंकि अपीलकर्ता अनुपस्थित रहे।

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली ने अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली ने अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। 

HighLights

  1. NCLAT ने इंकैब इंडस्ट्रीज सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तक टाली।

  2. अपीलकर्ताओं की अनुपस्थिति पर ट्रिब्यूनल ने अंतिम मौका दिया।

  3. सुप्रीम कोर्ट ने इंकैब की अपील पहले ही खारिज कर दी।

जासं, जमशेदपुर। इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड (केबुल कंपनी) को पुनर्जीवित करने से जुड़े मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT), नई दिल्ली ने अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। 
 
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ, जिस पर ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें अगली तारीख पर अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है।
 

सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है अपील  

एनसीएलएटी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि 30 जून 2026 को पारित आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपील खारिज हो चुकी है। 
 
इसके साथ ही इंकैब इंडस्ट्रीज का रेजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) संबंधित न्यायिक प्राधिकरण से औपचारिक रूप से स्वीकृत हो चुका है। एनसीएलएटी ने भी 30 जून 2026 के अपने पूर्व आदेश में इस मंजूरी को पूरी तरह बरकरार रखा था।
 
यह आदेश कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना, तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा और अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने जारी किया। 
 
ट्रिब्यूनल में शंभू शरण पांडेय और भगवती सिंह द्वारा दायर विभिन्न कंपनी अपीलों पर एक साथ सुनवाई चल रही थी।
 
उल्लेखनीय है कि एनसीएलटी ने 3 दिसंबर 2025 को ही कंपनी को पुनर्जीवित करने का आदेश दे दिया था, लेकिन कुछ पक्षों द्वारा अपीलिएट कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
 

मजदूरों का हक अटकाने की साजिश: यूनियन  

मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इंडियन केबल वर्कर्स यूनियन के महामंत्री राम विनोद सिंह ने कहा कि एनसीएलटी के पुनरुद्धार आदेश के बावजूद कुछ लोग मामले को जानबूझकर लंबित रखने की मंशा से कोर्ट गए। 
 
उन्होंने आरोप लगाया कि याचिका दाखिल करने वाले खुद सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रहे हैं, जिससे केवल समय बर्बाद हो रहा है। यदि यह मामला अदालतों में न अटकाया जाता, तो मजदूरों को अब तक उनका बकाया हक मिल चुका होता।

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