जमशेदपुर, जासं। वर्तमान में भारतीय मुसलमानों द्वारा केवल मांस ही नहीं, अपितु प्रत्येक पदार्थ एवं वस्तु इस्लाम के अनुसार वैध अर्थात 'हलाल' शब्द का प्रयोग करने की मांग की जा रही है। इसके लिए विविध प्रतिष्ठानों को 'हलाल सर्टिफिकेट (प्रमाणपत्र)' लेना अनिवार्य किया जा रहा है।

जमशेदपुर के हिंदू जनजागृति समिति से जुड़े सुदामा शर्मा ने बताया कि इसके द्वारा धार्मिकता के आधार पर चलार्इ जानेवाली 'इस्लामी अर्थव्यवस्था' अर्थात 'हलाल इकॉनॉमी' अत्यधिक धूर्तता से धर्मनिरपेक्ष भारत में लागू की गर्इ है। यह 'हलाल अर्थव्यवस्था' क्या है?, कौन-कौन से पदार्थ 'हलाल' के रूप में बेचे जाते हैं?, कौन-कौन से उद्योग 'हलाल सर्टिफिकेशन' की बलि चढे हैं? इसमें सरकार के कौन कौन से विभाग सहभागी होकर 'हलाल प्रमाणित' वस्तुएं बेचते हैं?, 'हलाल अर्थव्यवस्था' के कारण अन्य व्यवसायियों पर क्या परिणाम होता है?, 'हलाल सर्टिफिकिट' लेने के लिए कार्यरत तंत्र सरकारी है अथवा निजी?, 'हलाल अर्थव्यवस्था' से मिलनेवाले पैसे का उपयोग निश्चित रूप से किन कारणों के लिए किया जाता है?, इन एवं एेसे अनेक प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए ‘हिंदू जनजागृति समिति' द्वारा 'चर्चा हिंदू राष्ट्र की' इस परिसंवाद माला में 'हलाल सर्टिफिकेशन : एक आर्थिक जिहाद' इस विषय पर शनिवार को विशेष संवाद आयोजित किया जा रहा है।

शाम सात बजे से होगा संवाद

इस विशेष संवाद में 'झटका सर्टिफिकेशन एथॉरिटी' के चेयरमैन रविरंजन सिह, 'विवेकानंद कार्य समिति' के अध्यक्ष नीरज अत्री इस विषय के अभ्यासक तथा हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे सम्मिलित होने वाले हैं। यह कार्यक्रम 18 सितंबर को शाम 7 बजे समिति के 'HinduJagruti.org' इस जालस्थल पर, 'HinduJagruti' इस 'यू-ट्यूब चैनल' पर व '@HinduJagrutiOrg' इस ट्वीटर हैंडल पर सब देख सकते हैं। समिति के हिंदू जनजागृति समिति के पूर्व व पूर्वोत्तर राज्य समन्वयक शंभू गवारे ने कहा है कि हिंदू समाज को इस कार्यक्रम में अवश्य शामिल होना चाहिए, जिससे वह समझ पाए कि क्या वे हलाल प्रमाणित पदार्थ-वस्तुएं तो नहीं ले रहे हैं।

आप यह कार्यक्रम निम्नांकित लिंक पर देख सकते हैं

- Hindujagruti.org

- Youtube.com/HinduJagruti

- Twitter.com/HinduJagrutiOrg

Edited By: Rakesh Ranjan