जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : अपने आप में खोए रहना, अकेले रहना, किसी से बात नहीं करना आदि मानसिक रोग के लक्षण हैं। उक्त बातें गुरुवार को जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. बीएन ऊषा ने कही।

विश्व मानसिक दिवस के मौके पर सिविल सर्जन कार्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सिविल सर्जन डॉ. महेश्वर प्रसाद व विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. एके लाल उपस्थित थे। सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. दीपक गिरी ने बताया कि भागदौड़ की जिंदगी में मानसिक रोगियों का बढ़ना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि युवाओं में खुदकशी के मामले तेजी से बढ़े हैं। उम्र 15 से 29 वर्ष के लोगों में इस तरह की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अगले एक सप्ताह तक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

डॉ. दीपक गिरी ने कहा कि खुदकुशी के लक्षण को पहचान कर इससे बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि युवक जब अत्यधिक तनाव में रहता है तो उसके बाद के 40 सेकेंड बहुत महत्वपूर्ण होता है। उसी दौरान अक्सर लोग गलत कदम उठा लेते हैं। उस लक्षण को पहचानने की जरूरत है। मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है। इस अवसर पर डॉ. जॉय मित्रा, डॉ. असद, जिला मानसिक विभाग के पवन कुमार, श्रवण कुमार, गीतांजली कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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मानसिक रोग के लक्षण

- बिल्कुल चुपचाप हो जाना।

- बहुत आलसी व उदास हो जाना, बात-बात में चिल्लाना, काम में मन नहीं लगना और दुखी रहना।

- रात में नींद नहीं आना, बार-बार नींद टूट जाना।

- निराश एवं आत्मघाती विचारों का मन में आना।

- अकारण चिंता, अधिक घबराहट, पसीना आने लगना।

- बहुत बोलना, बड़ी-बड़ी बातें करना आदि।

Posted By: Jagran

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