झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता जब जोश में आते तो वे अपनी बॉडी मसल्स को दिखाने लगते। चाहे वह वैक्सीन लेने की बात हो या फिर जोशीले कार्यक्रम। लेकिन, क्या यह जोश व जुनून स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम में देखने को मिलेगा। यह बड़ा सवाल है। अभी एक साल के अंदर वैसा कुछ देखने को तो नहीं मिला है लेकिन लोगों को उम्मीद बहुत है। आगे यह जोश कायम रहता है या फिर अन्य नेताओं की तरह ढीला पड़ जाएगा वह देखने वाली बात होगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की बदतर स्थिति को सुधारने में वह जुटे हुए हैं। वह खुद भी बोलते हैं कि अगर एमजीएम अस्पताल को मैं नहीं सुधार सकता तो दूसरा कोई भी नहीं सुधार सकता। सही भी है। क्योंकि अभी तक इस अस्पताल में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री व सचिव सभी आते व जाते रहे लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रिसिपल बनने को चक्कर लगा रहे डॉक्टर

महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज के प्रिसिपल डॉ. पीके बारला 27 फरवरी को रिटायर्ड हो रहे हैं। ऐसे में एक डॉक्टर साहब उस पद के लिए जी-जान से मेहनत कर रहे हैं। हालांकि, अगले दो-तीन माह के अंदर वे भी रिटायर्ड होने वाले हैं, जिसके कारण उनका पता कटने की पूरी गुंजाइश दिख रही है। लेकिन वे कोशिश करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वह इस चक्कर में भी हैं कि सरकार जल्द से जल्द रिटायर्ड होने की उम्र सीमा 65 से बढ़ाकर 70 कर दे। इसे लेकर वह अखबार में खबर भी छापना चाहते है। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्य बिहार में रिटायर की उम्र सीमा 70 कर दी गई है। यहां भी यह प्रस्ताव पास होना है लेकिन सरकार के पास फिलहाल अटका हुआ है। आजकल वे डॉक्टर साहब एक विभाग के विभागाध्यक्ष है। इससे पूर्व वह कई बार अधीक्षक रह चुके हैं।

एक्यूप्रेशर वाले बन गए फिजियोथेरेपिस्ट

साकची के एक एक्यूप्रेशर चिकित्सक पर जल्द ही गाज गिर सकती है। इनकी चर्चा इन दिनों स्वास्थ्य विभाग में खूब हो रही है। इनकी खासियत है कि ये मरीजों के हिसाब से उसके विशेषज्ञ डॉक्टर बन जाते हैं और जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हाल ही में शहर के एक वरीय डॉक्टर इनके यहां एक्यूप्रेशर कराने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि एक ही व्यक्ति कभी एक्यूप्रेशर विधि से इलाज कर रहा है तो कभी फिजियोथेरेपी से। उसे देख डॉक्टर साहब कमा खा गए कि आखिर ये कौन विशेषज्ञ है। हालांकि, शहर में यह इकलौते नहीं है। इस तरह के फर्जी डॉक्टर गली-गली में भरे हुए हैं। बाराद्वारी व दाईगुट्टू में एक-एक फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित हो रही है, जिसके डॉक्टर फर्जी हैं। इन दिनों सेंटरों की सूचना जिला स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियों के पास पहुंची है। उम्मीद है कि जल्द कार्रवाई होगी।

आइएमए का कौन होगा किग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के चुनाव को लेकर शहर में चिकित्सकों में सरगर्मी है। उम्मीद है कि जल्द चुनाव होगा। चुनाव दिलचस्प होने वाला है। अध्यक्ष व सचिव पद का मुकाबला जोरदार होने वाला है। अध्यक्ष पद के लिए आइएमए के पूर्व सचिव डॉ. जीसी माझी मैदान में उतर चुके हैं। वहीं, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. उमेश खां इस बार चुनाव लड़ने के मूड में नहीं दिख रहें हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है। इधर, सचिव पद अभी तक तीन चिकित्सकों ने दावेदारी किया है। इसमें डॉ. सौरव चौधरी, डॉ. संतोष गुप्ता व डॉ. शरद कुमार शामिल हैं। वहीं, वर्तमान सचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह अभी तक अपना पता नहीं खोले हैं। हालांकि, अंदरे-अंदर वे भी तैयार है। समय व परिस्थिति का इंतजार कर रहे हैं। डॉ. मृत्युंजय सिंह लंबे समय से आइएमए के सचिव पद पर काबिज रहे हैं। अब तय वोटरों को करना है।

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