जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : पीएचडी का इंतजार कर रहे कोल्हान विश्वविद्यालय के छात्रों को शुक्रवार अच्छी खबर मिली। पीएचडी घोटाले की जांच कर रही कमेटी ने पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा परिणाम के प्रकाशन पर लगी रोक को हटा दिया है और 31 जुलाई को परीक्षा परिणाम प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। विश्वविद्यालय कुलानुशासक डॉ. एके झा ने इस संबंध में बताया कि कमेटी की तरफ से फैसले में कहा गया है कि संबंधित विषयों के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष को यह सुनिश्चित करना होगा कि विभाग की ओर से संचालित पीएचडी कोर्स वर्क की प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमानुसार संचालित हुई है। इससे पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा देने के बाद परिणाम का इंतजार कर रहे करीब 600 छात्रों को सीधा फायदा होगा। इन सभी छात्रों ने वर्ष 2016 में शोध प्रवेश परीक्षा पास की।

कमेटी ने अपने दूसरे बड़े फैसले में कहा है कि जेआरएफ, नेट, एमफिल योग्यताधारी उम्मीदवारों को शोध की अनुमति प्रदान की जाती है। अगर इन उम्मीदवारों ने डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल की प्रक्रिया पूरी कर ली है तो ऐसे मामलों में शोध पंजीकरण की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके अलावा वर्ष 2012 में कोल्हान विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित शोध प्रवेश परीक्षा के दौरान सामान्य वर्ग के वैसे छात्र जिन्होंने 55 फीसद अंक एवं ओबीसी तथा एसटी व एसी वर्ग के वैसे छात्र जिन्होंने 50 फीसद अंक प्राप्त किया हो, उन्हें शोध कार्य प्रारंभ करने की अनुमति प्रदान कर दी गई। कमेटी ने फैसला किया है कि इस मामले पर अगली बैठक आगामी 18 जुलाई को होगी। इसमें फाइनल ड्राफ्ट पर चर्चा करने के बाद संबंधित रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी जायेगी। यह बैठक जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. रणजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सिंडिकेट सदस्य राजेश कुमार शुक्ल, मनोज सिंह, विश्वविद्यालय अधिकारियों में राजेंद्र भारती, एके उपाध्याय, डॉ. अविनाश सिंह उपस्थित थे।

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छात्र एवं विश्वविद्यालय हित में लिया गया फैसला : प्रोवीसी

जासं, जमशेदपुर : पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा परिणाम प्रकाशन पर रोक हटाने के मामले में पीएचडी घोटाला जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि यह फैसला विश्वविद्यालय व छात्र हित में लिया गया है। कब कॉलेजों में शिक्षक भर्ती प्रारंभ हो जाए मालूम नहीं है। लेकिन यह अगर निकल जाता है और इसमें अगर केयू के छात्र आवेदन नहीं कर पाते हैं तो यह सभी अर्हता पूरी करने वाले छात्रों के साथ अन्याय है। इस कारण यह फैसला लेना पड़ा। जब सब कुछ नियम के अनुसार हुआ है तो ऐसे में इनके रिजल्ट रोकने का कोई मतलब नहीं था। जांच चल रही थी और जांच कमेटी के सदस्यों ने भी इस पर एकराय दिखाई। पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा को लेकर जहां गड़बड़ी हुई है, उनकी जांच जारी रहेगी।

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क्या था पूरा मामला

कोल्हान विश्वविद्यालय में पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा में गड़बड़ी की बातें सामने आयी थी। प्रवेश परीक्षा के बावजूद कम नंबर लाने वाले छात्रों को दाखिला, पैरवी पुत्रों को बैक डेट में नामांकन, बिना क्लास के ही शोधकर्ताओं को पीएचडी की उपाधि, समेत तमाम मामले उजागर होने के बाद जांच कमेटी बनायी गई थी। जांच शुरू हुई तो सभी तरह के पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा परिणाम पर रोक लगा दी गई थी।

Posted By: Jagran