यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
40 हजार में बिका सबसे महंगा बकरा, ऐसे तय होती है कीमत
भूरा और सफेद रंग का बकरा ज्यादा कीमत का और काला व सफेद रंग का बकरा उससे कम कीमत का होता है।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बकरीद को 12 दिन बचे हैं। रविवार को बकरो का बाजार पूरे शबाब पर था। सबसे महंगा बकरा 40 हजार का बिका। इसके बाद बकरो की कीमत 30 हजार, 35 हजार 25 हजार तक रही। देशी नस्ल के बकरे आठ से 10 हजार रुपये के बीच बिके। दिन भर मे बाजार में बकरों का 80 लाख का कारोबार हुआ। बाजार मे 75 हजार रुपये के बकरे भी आए।
इस बार बकरों की कीमत में ज्यादा इजाफा हुआ है। जो बकरे पिछले साल 10 हजार में मिलते थे, वो इस साल 15 हजार के आसपास मिल रहे हैं। 60 किलो के आसपास का बकरा 40 हजार तक में बिका। ओल्ड पुरुलिया रोड के 12 नंबर से तौसीफ अपना बकरा ले कर आए थे। इसकी कीमत 45 हजार थी। एमजीएम रोड बाजार मे रविवार को खूब बकरे आए। जमशेदपुर के जुगसलाई, मानगो, धतकीडीह, रामदास भट्ठा, शास्त्रीनगर आदि जगहो के अलावा आसपास के गांवो से भी देशी बकरे आए थे। इनमे पटमदा, पोटका, बोड़ाम आदि इलाके के गांवों के बकरों की खासी संख्या रही।
डीलडौल से तय होती है कीमत
बकरों की कीमत डीलडौल से तय होती है। इलाहाबाद से बकरे लेकर आए हनीफ कुरैशी बताते है कि बकरा कद मे ऊंचा और खूबसूरत है तो उसकी ऊंची कीमत लगती है। इस तरह के बकरे अगर 60 किलो से ज्यादा वजन के है तो उनकी कीमत 40 हजार से ऊपर पहुंच जाती है। कीमत तय करने मे रंग का भी योगदान है। भूरा और सफेद रंग का बकरा ज्यादा कीमत का और काला व सफेद रंग का बकरा उससे कम कीमत का होता है। अगर बकरे का रंग एक ही है तो उसकी कीमत और घट जाती है।
इलाहाबाद से आए दो ट्रक बकरे
जमशेदपुर की बकरा बाजार मे इलाहाबाद से हर साल बकरे आते है। इस साल भी दो ट्रक बकरे आए है। ये तीन कारोबारियो हनीफ, रहमान और अकरम के है। इनमे से 25 बकरे बिक चुके है। रहमान बताते है कि देशी बकरो की तुलना मे बेहतर डीलडौल के चलते इलाहाबादी बकरे ज्यादा बिकते हैं।
बाजार में लगा रहा जाम
एमजीएम रोड के बकरा बाजार मे रविवार को बकरा बेचने वाले और खरीदार की काफी भीड़ रही। इसके चलते एमजीएम रोड पर जाम लगा रहा। आने-जाने वालो को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। जाम मे फंसे कई लोग तो समझ नही पाए और लोगो से पूछते रहे जाम क्यों लगा है। लेकिन, जब वो बाजार के पास से गुजरते तो समझ जाते कि ये जाम बकरा बाजार की देन है।
