जमशेदपुर। सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने पर जमशेदपुर के पूर्व आयकर आयुक्त श्वेताभ सुमन ने हरिद्वार में सरेंडर कर दिया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व की सजा बहाल रखा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से भी श्वेताभ सुमन को राहत नहीं मिल सकी। चूंकि, देहरादून से 2019 में श्वेताभ सुमन को हरिद्वार जेल शिफ्ट किया गया था, इसलिए मोहलत ख़त्म होने पर श्वेताभ सुमन ने जिला कारागार रोशनाबाद पहुंचकर सरेंडर किया है।

आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में कोर्ट ने पूर्व की सजा को बहाल किया

आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में सात साल की सजा होने पर श्वेताभ सुमन को 2019 में देहरादून जेल में मोबाइल पकड़े जाने के बाद हरिद्वार जेल शिफ्ट किया गया था। कुछ महीने बाद ही अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। इस बीच पिछले पांच मार्च 2022 को नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व की सजा बहाल करते हुए श्वेताभ सुमन, डॉ अरुण कुमार सिंह और राजेंद्र विक्रम सिंह के बेल बांड खारिज करते हुए हिरासत में लेने के आदेश दिए थे। आखिरकार श्वेताभ सुमन ने जिला कारागार रोशनाबाद पहुंचकर सरेंडर किया है। जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने इसकी पुष्टि की है।

जमशेदपुर में 1996 से लंबे समय तक रहे प्रतिनियुक्त, तबादले के बाद भी टाटा स्टील नहीं ले सकी उनसे बंगला

आयकर आयुक्त डॉ. श्र्वेताभ सुमन के कॅरियर का लंबा समय जमशेदपुर में रहा। वे यहां वर्ष 1996-97 में सहायक आयकर आयुक्त के रूप में पदस्थापित हुए थे। उसके बाद ये यहां आयकर उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त तक रहे। इससे भी बड़ी बात यह रही कि इस बीच इनका तबादला देश के कई शहरों में हुआ, लेकिन बिष्टुपुर के नार्दर्न टाउन स्थित बी-10 का बंगला आज तक स्थायी निवास बना हुआ है। यह क्वार्टर उन्हें 2001 में आवंटित हुआ था, लेकिन विभाग ने 2010 में ही इसे टाटा स्टील के सुपुर्द कर दिया था। लेकिन टाटा स्टील ने उसका बंग्ला अबतक नहीं ले पाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया में उनका तबादला पूर्णिया कर दिया गया था। इसके बाद उन्हें बंगला खाली करने का फरमान जारी किया गया, लेकिन श्र्वेताभ जबरन क्वार्टर में जमे रहे। बताया जाता है कि टाटा स्टील ने भी क्वार्टर खाली कराने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हो सकी। पिछले करीब एक साल से श्र्वेताभ सुमन सपरिवार दिल्ली में रह रहे थे, लेकिन यह बंगला खाली नहीं किया। इसमें उनके निजी कर्मचारी रहते हैं। इसका पता तब चला, जब अप्रैल 2018 में जब उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार किया तो बिष्टुपुर पुलिस ने इस बंगले को करीब एक सप्ताह तक सील करके रखा था।

पांच राज्यों से किया था तड़ीपार

डॉ. श्वेताभ सुमन का विभाग के उच्चाधिकारियों से भी विवाद था, जिसके बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने श्र्वेताभ सुमन को पांच राज्यों से तड़ीपार किया था। आदेश में कहा गया था कि जांच पूरी होने तक इनका तबादला बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा व छत्तीसगढ़ में नहीं किया जाए। इसके बाद इनका तबादला कोलकाता किया गया था, जहां इनकी प्रतिनियुकि्त कमिश्नर ओएसडी (आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के पद पर किया गया था। हालांकि इन्हें कोई काम नहीं दिया जाता था। कई वर्षो तक वे शनिवार व रविवार को कोलकाता से जमशेदपुर आते थे।

पत्रकार भी रहे हैं श्वेताभ, इसके साथ फिल्मों में भी किया है काम

श्वेताभ सुमन बताते थे कि उन्हें माता-पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसके लिए दिल्ली में डॉक्टरी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन उन्होंने इस पेशे को कभी नहीं अपनाया। ग्लैमर के प्रति हमेशा आकर्षित रहने की वजह से वे पत्रकार बन गए। दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय स्तर की जानी-मानी साप्ताहिक पत्रिका में करीब एक वर्ष तक नौकरी की। इसी बीच आइआरएस की परीक्षा दी और उनका चयन आयकर विभाग में हो गया। इसके साथ जमशेदपुर में बने फिल्म जननी फिल्म में भी उन्होंने काम किया था। इस फिल्म उन्होंने डॉक्टर का किरदार निभागा था।

Edited By: Sanam Singh