जमशेदपुर (जासं)।  ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के रेफरी बोर्ड के निदेशक रविशंकर की माने तो झारखंड में रेफरियों की स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने झारखंड में रेफरी की गिरती अवस्था पर दुख प्रकट किया और कहा कि यहां के रेफरी को एसोसिएशन का सपोर्ट सही ढंग से मिलना चाहिए। रेफरी किसी भी ग्रुप का प्रतिनिधित्व नहीं करते। रेफरी का काम मैच संचालित करना है। 

दो वर्ष से नहीं कर पा रहे अच्छा

उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में रेफरी के कोर्स या रेफरी के टेस्ट को लेकर कई बार आने का मौका मिला है। यहां व्यवस्था बहुत अच्छी रही है। ऐसे में रेफरी का स्तर ऊंचा होना ही चाहिए, लेकिन दुख का विषय यह है कि पिछले दो वर्षों से यहां के रेफरी बहुत अच्छा नहीं कर पा रहे हैं। 

मतभेदों को करना होगा दरकिनार

उन्होंने राज्य संघ के अध्यक्ष और सचिव को आपसी मतभेद भुलाकर रेफरी के समर्थन में मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल के विकास के लिए रेफरी का होना बहुत जरूरी है। रेफरी के विकास के लिए भी फुटबॉल। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। हम दोनों को अलग नहीं कर सकते। 

रेफरी कमेटी  स्वतंत्र: नजम

इस मौके पर अपने भाषण में अध्यक्ष नजम अंसारी ने कहा कि हम खेलों के साथ-साथ रेफरी कभी विकास चाहते हैं। हमें कोई आपत्ति नहीं है। रेफरी बोर्ड जिनको रेफरी कमेटी में रखना चाहे रख सकते हैं, हम हमेशा फुटबॉल और रेफरी दोनों के विकास के लिए तत्पर हैं।

ये रहे मौजूद 

इस मौके पर जमशेदपुर के पूर्व फीफा रेफरी विनोद कुमार सिंह, जमशेदपुर एफसी के सीईओ मुकुल विनायक चौधरी, टाटा स्टील खेल विभाग के चीफ रवि राधाकृष्णन, स्पोर्ट्स हेड आशीष कुमार, जेएसए के सचिव अविनाश कुमार के साथ साथ झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष नजम अंसारी भी मौजूद थे। 

Posted By: Rakesh Ranjan

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस