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Dhalbhumgarh Airport : 240 नहीं अब 540 एकड़ भूमि पर आकार लेगा कोल्हान का नया एविऐशन हब

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:00 AM (IST)

कोल्हान क्षेत्र में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना का विस्तार 240 एकड़ से बढ़ाकर अब 540 एकड़ किया जा रहा है, जिससे यह एक प्रमुख एविऐशन हब बनेगा।

नागर विमानन विभाग ने एएआइ और केंद्र के साथ समन्वय किया तेज, 19 बिंदुओं के जवाब भेजे, अब मंजूरी का इंतजार

नागर विमानन विभाग ने एएआइ और केंद्र के साथ समन्वय किया तेज, 19 बिंदुओं के जवाब भेजे, अब मंजूरी का इंतजार

HighLights

  1. स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण पर काम किया जाएगा।

  2. केंद्र से तकनीकी व पर्यावरणीय मंजूरी का इंतजार है।

  3. हाथी कॉरिडोर का नया वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाएगा।

जाटी, जमशेदपुर/रांची। कोल्हान क्षेत्र के हवाई संपर्क (Air connectivity) के सबसे बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट धालभूमगढ़ एयरपोर्ट को धरातल पर उतारने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। 
 
भविष्य की व्यावसायिक और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अब इस एयरपोर्ट के आकार में बड़ा विस्तार किया गया है। पहले इसे लगभग 240 एकड़ में विकसित करने की योजना थी, जिसे अब बढ़ाकर 540 एकड़ कर दिया गया है।
 
झारखंड नागर विमानन विभाग ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), वन एवं पर्यावरण विभाग और केंद्र सरकार के साथ उच्च स्तरीय समन्वय स्थापित कर सभी प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
 

केंद्र के 19 बिंदुओं का जवाब भेजा, क्लीयरेंस का इंतजार 

परियोजना के मार्ग में सबसे महत्वपूर्ण पहलू वन भूमि और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे हैं। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार द्वारा पूछे गए 19 प्रमुख बिंदुओं का विस्तृत जवाब और आवश्यक एनओसी (NOC) भेज दी गई है। 
 
वन एवं गैर-वन भूमि का सीमांकन कार्य भी पूरा कर लिया गया है। अब केवल केंद्र सरकार की अंतिम तकनीकी व पर्यावरणीय स्वीकृति का इंतजार है।
 

एलीफेंट कॉरिडोर का दोबारा होगा वैज्ञानिक सर्वे 

धालभूमगढ़ क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी और एलीफेंट कॉरिडोर होने के कारण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना पहली प्राथमिकता है। 
 
हाथियों के प्राकृतिक आवागमन और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने पूरे कॉरिडोर का नए सिरे से वैज्ञानिक सर्वे कराने की पहल की है। वाइल्डलाइफ और केंद्रीय मानकों के अनुरूप ही एयरपोर्ट के निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
 

संयुक्त टीम ने किया स्थल निरीक्षण 

नागर विमानन विभाग, AAI और रांची एयरपोर्ट के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने हाल ही में प्रस्तावित 540 एकड़ स्थल का दौरा कर भौतिक स्थिति का जायजा लिया। 
 
नागर विमानन विभाग इस परियोजना में नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है, ताकि जमीन हस्तांतरण, आधारभूत संरचना और विभागीय मंजूरियों की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के एक साथ पूरी की जा सके।

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धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। एएआइ के साथ भी लगातार बातचीत हो रही है। भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। केंद्र से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण पर काम किया जाएगा।

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कैप्टन एसपी सिन्हा, निदेशक (परिचालन), नागर विमानन विभाग, झारखंड