जमशेदपुर, जेएनएन। Coronavirus Effect कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों में खेतों में गेहूं की फसल अब पककर तैयार हो चुकी है। अप्रैल के पहले हफ्ते में किसान इसे काटकर खलिहान में रखेंगे। इलाके में लाकडाउन की वजह से कई जगह मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं।

पश्चिम सिंहभूम के जिला कृषि पदाधिकारी राजेंद्र कुमार के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिले में बहुत कम रकबे में गेहूं की खेती होती है। जिले के नोवामुंडी, टोंटों, खूंटपानी, सोनुवा, गोइलकेरा, बंदगांव आदि क्षेत्र में किसानों ने अपने खाने भर के लिए गेहूं लगाया है। इस साल जेटीडीएस के साथ मिलकर पूरे जिले में करीब 1500 हेक्टेयर में ही गेहूं की खेती हुई है। फसल अब पक कर तैयार है। चूंकि, एक-दो एकड़ में ही एक किसान गेहूं लगाता है इसलिए इसकी कटाई में किसान को ज्यादा परेशानी नहीं होती है। किसान खुद ही फसल काट लेते हैं। अलग से कोई मजदूर नहीं रखते हैं। मेरेलगाड़ा गांव के किसान राम हेम्ब्रम ने बताया कि गेहूं फसल पककर लगभग तैयार है। चूंकि, इस साल मागे पर्व और बाहा पर्व देर से मनाया गया, इस कारण फसल काटने में देरी हुई। यहां पर्व के बाद ही गेहूं फसल काटने की परंपरा रही है। अप्रैल के पहले साप्ताह से फसल की कटाई की शुरुआत की जाएगी।

यहां होती 100 एकड़ में गेहूं की खेती

पश्चिमी सिंहभूम के कृषि विज्ञान केंद्र जगन्नाथपुर के प्रभारी डा प्रमोद कुमार के अनुसार, जगन्नाथपुर प्रखंड में करीब 100 एकड़ भूमि पर गेहूं की खेती होती है। वर्तमान में कई जगह फसल पक कर तैयार है, लेकिन लॉकडाउन के कारण फसल की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। साथ ही अभी दो से तीन लोगों की भीड़ भी उचित नहीं है। फसल की कटाई गर्मी का असर शुरू होने से पहले हो जानी चाहिए। यदि गर्मी का ताप पड़ेगा तो खेत में खड़ी फसल खुद टूट कर गिर सकती है।

सरायकेला का ये हाल

 सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया में कुछ किसानों ने बताया कि फसल अब तेजी से पक रही है, हफ्ते भर में कटाई शुरू हो जाएगी।

किसान नहीं कराना चाह रहे मजदूरी

पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड के काश्मार गांव निवासी हिमांशु शेखर तिवारी बताते हैं कि फसल तो इस समय पककर खेत में तैयार है, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के भय से मजदूर खेतों में मजदूरी करने से डर रहे हैं। किसानों को मौसम की बेरुखी का भी डर सता रहा है। कहीं तैयार फैसलों पर पानी न फिर जाए। लॉकडाउन के कारण किसी से किसान मजदूरी कराना नहीं चाह रहे हैं।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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