जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। दैनिक जागरण ने शुक्रवार को कोरोना योद्धा सम्मान समारोह का आयोजन किया, जिसमें शहर के सफाईकर्मी, पारा मेडिकल स्टाफ, चिकित्सक, समाजसेवी समेत कोरोना के दौरान जरूरतमंदों की उल्लेखनीय सेवा करने वालों को सम्मानित किया गया। बिष्टुपुर स्थित होटल रमाडा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कोरोना योद्धाओं को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सूरज कुमार, सिविल सर्जन डा. एके लाल, एसीएमओ डा. साहिर पाल व दैनिक जागरण के सीनियर जीएम मनोज गुप्ता ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

इस दौरान कुछ कोरोना योद्धाओं ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन उदय चंद्रवंशी ने किया, जबकि आयोजन को सफल बनाने में प्रायोजकों की भूमिका सराहनीय रही। कार्यक्रम के अंत में डा. गुरजीत सिंह ने गजल पेश की, तो संजय पराशर ने सैक्सोफोन पर संगीत की सुरलहरी से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

ये किए गए सम्मानित

इनोवेशन : विवेक ने बनाया कोविड फेस शील्ड मास्क

कीताडीह निवासी विवेक राज भुवनेश्वर के आईटीईआर कॉलेज के कम्प्यूटर साइंस एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के थर्ड ईयर के छात्र हैं। लॉकडाउन लगा तो विवेक घर पहुंचे और कोविड से बचाव के लिए कुछ नया करने की सोची और शहर में सबसे पहला कोविड फेस शील्ड मास्क को मात्र 10 रुपये की लागत से तैयार किया। इनके द्वारा तैयार इस मास्क को पोटका विधायक, विभिन्न प्रखंडों के बीडीओ और सभी थानों में कार्यरत पुलिस पदाधिकारियों को निश्शुल्क पहुंचाया गया। विवेक की इस पहल को जिला प्रशासन ने प्रोत्साहित करते हुए उनसे फेस शील्ड खरीदा और शहर के चेकनाकों में कार्यरत पुलिस व मजिस्ट्रेट को मुहैया कराया, ताकि वे कोविड 19 के संक्रमण से बच सकें।

बियोंड द कॉल ऑफ ड्यूटीः डाक्टर

डॉ. अरुण कुमार, अधीक्षक, एमजीएम अस्पताल : कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम ने कोरोना काल में बेहतर कार्य किया।

डॉ. एके लाल, सिविल सर्जन : कोरोना से निपटने में इनकी अहम भूमिका रही। निराशा के बीच इन्होंने कर्मचारियों का हौसला बढ़ाते रहे। साथ ही, जब बेड की किल्लत होने लगी तब उन्होंने बिना देर किए हुए सदर अस्पताल में 100 बेड व कांतिलाल अस्पताल में 90 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था कराई, जो काफी सराहनीय पहल रही।

डॉ. साहिर पाल : जिला सर्विलांस पदाधिकारी : कोरोना संदिग्ध लोगों की जांच करने से लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की बड़ी जिम्मेदारी इन्होंने निभाई। कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए इन्होंने कई तरह के प्रयास किए, जो काफी सफल रहे।

डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी : पूर्व उपाधीक्षक, एमजीएम : एमजीएम में जब कोविड वार्ड की शुरुआत हुई, तब व्यवस्था कुछ भी नहीं थी लेकिन इन्होंने अपनी सुझबूझ के साथ सभी खामियों को दूर किया।

डॉ. एबीके बाखला, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल : कोरोना की दूसरी लहर में इनके ससुर का देहांत हो गया। पत्नी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। इसके बावजूद योद्धा की तरह ड्यूटी पर 24 घंटे डटे रहे। एक दिन भी छुट्टी नहीं ली और मरीजों की सेवा करते रहे।

डॉ. उमेश खां, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन : कोरोना की पहली लहर में संक्रमित हुए। इसके बावजूद मरीजों को फोन पर सलाह देते रहे। जैसे ही ठीक हुए फिर से मरीजों की सेवा में जुट गए। एक दिन भी इन्होंने अपना क्लीनिक बंद नहीं रखा। 

डॉ. बलराम झा : फिजिशियन, एमजीएम : शुरुआती दौर में ऐसा भी देखा गया जब जूनियर डाक्टर व नर्स कोविड वार्ड में जाने से डरती थीं। तब इन्होंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उन्हें समझाया और उनमें विश्वास जगाने के लिए सबसे पहले कोविड वार्ड में प्रवेश करते थे, ताकि जूनियर साथियों का मनोबल बढ़ सके। बीते डेढ़ साल से डॉ. बलराम झा कोविड वार्ड में मरीजों की सेवा कर रहे हैं।

डॉ. पियाली गुप्ता : असिस्टेंट प्रोफेसर, एमजीएम : झारखंड में सबसे पहले कोरोना की जांच जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में ही शुरू हुइ और इसमें इनका अहम योगदान रहा है।

डॉ. रविभूषण अग्रवाल, फिजिशियन, एमजीएम : शुरुआती दौर में जब कोरोना के मरीज बढ़ने लगे तब एमजीएम में 100 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया। इस दौरान इन मरीज और कोरोना वारियर्स को चार टाइम का नाश्ता और भोजन भी उपलब्ध कराना था, जिसके लिए अस्पताल प्रबंधन के पास फंड नहीं था। इस कारण से अधीक्षक से लेकर उपाधीक्षक तक चिंतित थे। लेकिन तभी डॉ. रविभूषण अग्रवाल ने सभी मरीज व कोरोना वारियर्स को भोजन कराने की जिम्मेदारी उठाई। लगातार छह माह तक इन्होंने अपनी जेब से उन सभी को पौष्टिक भोजन कराया। इस दौरान हर माह लगभग एक लाख रुपये खर्च किए।

 डॉ. उमेश प्रसाद, एनेस्थीसिया रोग विशेषज्ञ, ब्रह्मानंद अस्पताल : कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक सांस की परेशानी मरीजों को हुई। जिनकी स्थिति गंभीर हो रही थी उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही थी। इस दौरान वेंटिलेटर को सही ढंग से संचालित करने के लिए प्रशिक्षित एनेस्थीसिया चिकित्सकों की मुख्य भूमिका होती है। यह जिम्मेदारी डॉ. उमेश प्रसाद ने पूरी ईमानदारी से निभाई। इस दौरान ये संक्रमित भी हुए, लेकिन ठीक होते ही फिर ड्यूटी पर लौटे।

डॉ. लक्ष्मी कुमारी : चिकित्सा पदाधिकारी, जुगसलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : कोरोना की पहली लहर में इनके पति डॉ. बीरेंद्र सेठ, (जो डुमरिया स्वास्थ्य केंद्र में तैनात थेे) ड्यूटी करते-करते अपनी जान गंवा दी। उस दौरान डॉ. लक्ष्मी के जीवन में पहाड़ टूटकर गिर गया, लेकिन वह डगमगाई नहीं। इतनी बड़ी घटना के बावजूद एक योद्धा की तरह अपनी ड्यूटी पर डटी रही।

डॉ. असद : महामारी रोग विशेषज्ञ, जिला सर्विलांस विभाग : कोरोना की पहली लहर हो या दूसरी डॉ. असद सुबह निकलते तो घर लौटने का समय नहीं होता था। इनके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी थी। कंटेनमेंट जोन में मरीजों की पहचान करने से लेकर उनका रिकार्ड तैयार करना और अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी इनके ऊपर है।

डॉक्टर जरीना : अपने शहर को छोड़कर दरभंगा में निशुल्क सेवा प्रदान की।

पारा मेडिकल स्टाफ - वरुण पाल, लैब टेक्नीशियन : शुरुआती दौर में जब लोग किसी के पास जाने से डरते थे तब इन्होंने घर-घर जाकर लोगों का नमूना लेने का काम किया, जो अभी भी जारी है।

अमितकुमार : फार्मासिस्ट : होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को कब क्या दवा खानी है और कितनी मात्रा में लेनी है, उन सभी को इन्होंने फोन कर बताने का काम किया, ताकि वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें।

जॉयदीप बनर्जी : लैब टेक्नीशियन : एमजीएम अस्पताल के सीनियर लैब टेक्नीशियन होने के नाते इन्होंने जूनियर को प्रशिक्षित किया। ताकि मरीजों की रिपोर्ट समय पर मिल सकें। यहां मैनपावर की कमी होने के बावजूद मरीजों को रिपोर्ट के लिए कभी इंतजार नहीं करना पड़ा। इसमें जॉयदीप बनर्जी की अहम भूमिका रही।

लक्ष्मी पति दास : कोविड वार्ड, एमजीएम : कोविड वार्ड को संभावने में लक्ष्मपित दास का अहम योगदान रहा है। जब कोरोना पीक पर था तब ये कई दिन घर भी नहीं गए और 24 घंटे मरीजों की सेवा में जुटे रहे। नतीजा हुआ कि मरीजों को बेहतर चिकित्सा मिली और कम से कम मौत हुई।

कार्तिक महतो : लैब टेक्नीशियन : जिला सर्विलांस विभाग में जब भी फोन की घंटी बजती थी तब कार्तिक महतो को ढूंढा जाता था। चूंकि लोगों की तबीयत खराब होते ही वह विभाग को फोन करते थे और उस दौरान बिना देरी किए हुए कार्तिक महतो को एंबुलेंस लेकर उनके घर जाना पड़ता था।

राखी कुमारी : प्रखंड लेखा प्रबंधक, जुगसलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : जुगसलाई क्षेत्र के कोरोना मरीजों की रिपोर्ट तैयार करने से लेकर उनको अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी निभाई। साथ ही, सहियाओं की ड्यूटी बांटने की जिम्मेदारी भी इनके ऊपर थी।

फ्रंटलाइन वर्कर्स- सुरु पात्रो, सफाई सेवक : जब लोग एक-दूसरे को छूने में डरते थे तब सुरु पात्रो ने कोरोना मृतकों का शव ढोने का काम करते थे। इनके जज्बे को सलाम करना चाहिए।

सुरेश्वर सागर : सफाई सेवक : कोरोना मरीजों के बीच में रहकर उनकी सफाई की निगरानी करने का काम किया।

रवि नामता : सफाई सेवक : कोरोना मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाले पीपीई किट को समय से निष्पादन करने की जिम्मेदारी निभाई।

गिरीश कारंवा : सफाई सेवक : कोविड वार्ड को 24 घंटे चकाचक रखने का कार्य गिरीश कारंवा ने किया।

संतोष यादव, होमगार्ड के जवान : शहर भर में चल रहे कोरोना जांच अभियान में लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। अभी तक एक बार भी संक्रमित नहीं हुए है। इनका कहना है कि सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का यह सख्ती से पालन करते हैं।

यंग टर्क- कुंदन कुमार, सोशल वर्कर, जिला स्वास्थ्य विभाग : विदेश से आने वाले लोगों की जानकारी लेने के साथ कोविड जांच के लिए उनका नमूना लेने और समय पर रिपोर्ट देने का काम किया। अभी इनकी ड्यूटी टाटानगर स्टेशन पर है। यहां बाहर से आने वाले लोगों का नमूना लिया जाता है और उनकी जांच होती है।

रूरल चैंपियन- डॉ मृत्युंजय धावड़िया, सीएचसी प्रभारी, पोटका :- पोटका के कोरोना संक्रमितों की जांच व टीकाकरण में अहम भूमिका रही।

इम्तियाज अहमद, अंचल अधिकारी पोटका :- कोरोना संक्रमितों की जांच के बाद टीकाकरण में पोटका प्रखंड को पूरे राज्य में बनाया अव्वल।

संतोष कुमार पांडा :- हमने देखा कि कोरोना वायरस दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था। लोग मर रहे थे। कोरोना पीड़ितों से अन्य लोग दूर भाग रहे थे तब हमने अपने जीवन की परवाह किए बिना राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का पालन किया और पीपीई किट पहनकर कोरोना मरीजों की मदद की।

अनसंग हीरो- सुशील तिवारी : डिस्ट्रिक डाटा मैनेजर, जिला सर्विलांस विभाग : कोरोना मरीजों से संबंधित सभी तरह की डाटा तैयार करने का काम किया। इसमें देश-विदेश से आने वाले मरीजों का भी आंकड़ा शामिल होता था।

सुमन कुमार मंडल : पब्लिक हेल्थ मैनेजर : कांतिलाल अस्पताल को संचालित करने में इनका अहम योगदान रहा है। इसके साथ ही सुबह-सुबह कोविड जांच के लिए टीम को रवाना करने की जिम्मेदारी निभाई। चेक पोस्ट पर तैनात टीम की निगरानी करने की जिम्मेदारी।

राजीव कुमार : जिला यक्ष्मा विभाग में तैनात राजीव कुमार ने ट्रूनेट मशीन से होने वाली कोरोना जांच में अहम भूमिका निभाई। संदिग्ध लोगों का नमूना लेने के बाद उन्हें समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराना यह बड़ी उपलब्धि रही।

 सुभाष युवा मंच: सुभाष युवा मंच द्वारा 35 हज़ार मास्क अभी तक जमशेदपुर के विभिन्न बस्तियों में रिक्शाचालक, ऑटो चालक, सब्जी विक्रेता आदि के बीच मास्क वितरित किया।

एनजीओ- उत्कर्ष भारत (राहुल कुमार) : प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था, राशन का दैनिक मजदूर, नाई समाज, टेम्पू ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर के बीच निश्शुल्क वितरण, एंबुलेंस की फ्री व्यवस्था, सेफ्टी किट का वितरण पुलिस एवम सफाईकर्मी के बीच, दवाई का वितरण, जागरूकता अभियान आदि।

समर्पित (अजय सिंह) :- भोजन की व्यवस्था, राशन वितरण, ऑक्सीजन सिलेंडर निशुल्क वितरण, सेफ्टी किट का वितरण, दवा वितरण आदि।

रामावती वेलफेयर सोसाइटी (अनुराग वर्मा) :-प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था व राशन वितरण, एंबुलेंस की फ्री व्यवस्था, सेफ्टी किट का वितरण ,दवा वितरण, ऑक्सीजन सिलेंडर का मुफ्त वितरण आदि।

अवेयरनेस योद्धा- सतवीर सिंह बग्गे : 24 घंटे दूसरों के लिए खड़े रहे। छोटा गोविंदपुर के सतवीर सिंह बग्गे जमशेदपुर प्रखंड के उप मुखिया संघ के अध्यक्ष भी हैं।

प्रभुनाथ सिंह : 400 लोगों से कराया प्लाजमा दान। टाटा स्टील के सीआरएम विभाग में कार्यरत सिंह रेडक्रॉस के सक्रिय सदस्य हैं।

फेक न्यूज बस्टर्स- डॉ. वनिता सहाय : कोरोना को लेकर गर्भवती महिलाओं में कई तरह की भ्रांतियां थी। उसे दूर करने के लिए इनके द्वारा महिला रोग विशेषज्ञों की ऑनलाइन बैठक की गई और महिलाओं को जागरूक करने का काम किया गया।

डॉ. एसी अखौरी : मणिपाल-टाटा मेडिकल कालेज में माइक्रो-बायोलाजी के प्रोफेसर डा. अखौरी ने कोरोना काल में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ वैक्सीन के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। दैनिक जागरण के अभियान से भी जुड़े रहे।  डॉ. आरएल अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन : कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर दैनिक जागरण द्वारा चलाए गए अभियान में इन्होंने अहम भूमिका निभाई। लोगों को वैक्सीन से होने वाले फायदे के बारे में बताया।

मोस्ट इंपैक्टफुल

सीएच गणेश राव, सचिव, स्वर्णरेखा बर्निंग घाट समिति : हर इंसान की अंतिम इच्छा होती है कि मरने के बाद उसे चार लोग कंधा देंगे। सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाए, लेकिन कोरोना काल में जब अपने बेटे-बेटी भी शव को छूने और देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। अपनों की संवेदना-भावना मर रही थी, तो ऐसे समय में सीएच गणेश राव ने उनका अंतिम संस्कार कराया। ये अब तक 1886 कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। इनकी सेवा भावना का ना केवल स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने आदर किया, बल्कि आज ये शहर से बाहर भी लोकप्रिय हो चुके हैं।

क्राइसिस मैनेजमेंट- रीना कुमारी, क्लर्क : होम आइसोलेेशन से लेकर अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की रिपोर्ट लेकर उसे अपडेट करने का काम इन्होंने किया।

प्रायोजक भी किए गए सम्मानित

‘टाइटल’ स्पांसर’ : श्री साई बालाजी इंटरप्राइजेज : निदेशक, शुभ्रांशु शुभम सिन्हा

इवेंट पार्टनर’ वृद्धि क्रिएशन : - ‘इन एसोसिएटेड विथ’ प्रियदर्शिनी होम्स : मार्केटिंग हेड पंकज- ‘पावर्ड बाई’ आस्था डेवलपर- ‘ज्वेलरी पार्टनर’ कुलदीप संस, आभूषण ज्वेलर्स व तनिष्क से सुधांशु, ‘पाइपिंग सोल्यूशंस पार्टनर’ फोर्स पाइप, - ‘पावर सोल्यूशन पार्टनर’ एराइज एसके सोल्यूशन : निदेशक संतोष कुमार सिंह- ग्रीन वाटिका, अर्थ नेक्सस प्राइवेट लिमिटेड से नीलम, मा कल्याणी सुजूूकी से नकुल तिवारी, स्काईवे से अभिषेक, आइएसडब्ल्यूपी, डा. पारसनाथ मिश्रा, दया हास्पिटल से मुमताज अहमद, न्यूरो क्लीनिक, शिवांगी गैस से निदेशक शुभम वाजपेयी, अनविका मोटर्स से पार्टनर अमित खंडेलवाल, कथूरिया कंसल्टेंसी व दलमा टी से शिवप्रकाश शर्मा शामिल थे।

 

Edited By: Rakesh Ranjan