जमशेदपुर (जागरण संवाददाता) । कोरोना की वजह से देश भर के साथ आदित्यपुर की छोटी-बड़ी कंपनियां कराह रही हैं। टाटा मोटर्स खुलने से भी उनकी स्थिति में कोई खास अंतर नहीं आया, बल्कि अब दोबारा फैक्ट्री बंद करने को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। छोटी कंपनियों को अगर जल्द आर्थिक सहायता नहीं मिली तो कई कंपनियां एक साथ बंद हो जाएंगी। इसकी वजह उत्पादों की  बिक्री नहीं होना है। कंपनी मालिकों का कहना है कि टाटा मोटर्स समेत सभी कंपनियां करीब 25 फीसद बिक्री व उत्पादन पर चल रही हैं। इसमें बैंक का ब्याज भी नहीं भरा जा सकता, कर्मचारियों का वेतन तो दूर की बात है। जब तक उत्पादन व बिक्री का औसत 40 फीसद तक नहीं होगा, स्थिति सामान्य नहीं होगी।

सिंहभूम चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अशोक भालोटिया बताते हैं कि पहले हमने सोचा था कि टाटा मोटर्स खुलेगी, वाहनों के शोरूम खुलेंगे तो स्थिति पटरी पर लौट जाएगी। वास्तव में ऐसा नहीं हुआ। बाजार में ग्राहक नहीं हैं। हालांकि बारिश के मौसम में वाहन बाजार पहले भी मंदा रहा है, इसलिए अब उम्मीद है कि अक्टूबर से स्थिति सामान्य हो सकती है। 25-30 फीसद उत्पादन व बिक्री में आदित्यपुर की तो सभी कंपनियां घाटे में चल रही हैं। आखिरकार हमें बिजली का फिक्स चार्ज, कर्मचारियों का वेतन, बैंक का ब्याज सबकुछ तो देना ही है। जब तक उत्पादन व बिक्री का औसत 50-60 फीसद नहीं होगा, स्थिति अच्छी नहीं रहेगी। कुछ कंपनियां तो आर्थिक रूप से इतनी टूट गई हैं कि उनके बंद होने की नौबत आ गई है।

यदि जल्दी इन्हें राज्य सरकार ने अनुदान नहीं दिया तो अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने तो हमारी कुछ नहीं सुनी। कम से कम बिजली का शुल्क माफ कर देती तो भी बहुत राहत मिलती। बिना कंपनी चलाए हमने चार माह तक पूरा बिल दिया, इसे जायज कैसे कह सकते हैं। ज्ञात हो कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी कुल 1182 कंपनियां हैं, जिसमें लगभग 900 कंपनियां टाटा मोटर्स पर निर्भर हैं। करीब एक दर्जन इंडक्शन फर्नेस व रोङ्क्षलग मिल हैं, जिनकी स्थिति पहले से खराब है। 

 

कोविड कर्ज से तात्कालिक राहत मिली

केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की मार से उबारने के दौरान कोविड कर्ज के तहत जो योजना लागू की थी, उसे कई कंपनियों ने लिया। हालांकि इससे तात्कालिक राहत तो मिल गई, लेकिन आगे चलकर कर्ज का बोझ तो बढ़ेगा ही। यह तो अनावश्यक कर्ज ही है, जो हमने कंपनी बचाने के लिए लिया। कर्ज तो कर्ज है, चुकाना तो पड़ेगा। सचमुच कोरोना ने सबकी जिंदगी तबाह कर दी। हम तो बस ईश्वर से एक ही प्रार्थना रोज करते हैं कि यह बीमारी दूर हो जाए।

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