जमशेदपुर, जेएनएन। झारखंड के जमशेदपुर से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का खास रिश्ता था। वे यहां कई दफा आते-जाते रहे और यहां के कई लोगों से खास लगाव था। आपको शायद ही पता हो कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जमशेदपुर से ही तत्कालीन लालू राज की तुलना जंगलराज से की थी।

वाकया वर्ष 2000 के फरवरी महीने का है। अटलजी की जमशेदपुर के बारी मैदान में चुनावी सभा थी। उसी दिन सुबह शहर के जुबिली पार्क में मार्निंग वाक के दौरान प्रमुख कारोबारी और पायल सिनेमा हाल के मालिक हरि सावा की हत्या कर दी गई थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने सभा को संबोधित करते हुए हत्याकांड की चर्चा की और कहा कि बिहार में जंगलराज है। लोग सुबह टहलने के लिए निकलते हैं तो उन्हें गोली मार दी जाती है।

टेल्को में रात भर रहे थे अटल जी

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष और राज्य कार्यसमिति के सदस्य रहे अनिल श्रीवास्तव को याद है कि करीब 32-33 साल पहले टेल्को कॉलोनी में रोड नंबर एक में शास्त्री जी की बेटी की शादी में आम लोगों की तरह अटलजी रातभर हे थे।

दीनानाथ पांडेय को रेडियो पर नाम लेकर बुलाया था

अटल बिहारी वाजपेयी ने रेडियो से संदेश देकर पूर्व विधायक दीनानाथ पांडेय को बिहार में मिलने के लिए बुलाया था। 1979 में जब जमशेदपुर में दंगा हुआ था तो वाजपेयी जी बिहार के एक होटल में ठहरे थे। उस समय लैंडलाइन फोन इक्का-दुक्का घर में हुआ करता था। तब ऑल इंडिया रेडियो में हुए एक प्रसारण के माध्यम से दीनानाथ पांडेय को पता चला कि वाजपेयी जी ने उन्हें बिहार में मिलने के लिए बुलाया है। तब वे पार्टी के एक अधिकारी अश्विनी कुमार के साथ वाजपेयी जी से मिलने के लिए बिहार गए थे।

लोगों में भरा था विश्वास

देश में उथल-पुथल मची थी। जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर छात्र समुदाय आंदोलित था। तत्कालीन केंद्र सरकार की ओर से देश में आपातकाल लागू किए जाने के बाद चारों तरफ गुस्से का आलम था। जमशेदपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोरंजन दास को याद है कि जब आपातकाल समाप्त होने के बाद अटल जी शहर आए थे। 1977-78 में जनता पार्टी की सरकार गठित हो चुकी थी। अटल जी शहर आए तो छात्रों के बड़े समूह के बीच घिरे रहे। छात्र उन्हें लेकर साकची बसंत टॉकीज के पास पहुंचे जहां जेपी आंदोलन के दौरान तीन छात्र पुलिस की गोली से मारे गए थे। उस जगह को शहीद स्थल कहा जाता है।

एके सरकार के घर पर ठहरते थे वाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री सह जनसंघ के संस्थापक में से एक अटल बिहारी वाजपेयी जब भी जमशेदपुर आते वह प्रख्यात अधिवक्ता व जनसंघ के संस्थापक स्वर्गीय अशोक सरकार के साकची स्थित आवास पर ही ठहरते थे। स्वर्गीय अशोक सरकार के पुत्र अधिवक्ता उदित सरकार बताते हैं कि जब 1971-72 में अटल बिहारी वाजपेयी ने जमशेदपुर के बारी मैदान में सभा की थी उसके बाद वापस उनके घर आए थे। जब वह बाथरूम फ्रेश होने के लिए गए तो उदित बाहर में तौलिया लेकर खड़े रहे थे। 1979 में जब अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे और जमशेदपुर में दंगा हुआ था तब जहाज से आए थे। दंगा प्रभावित इलाके का भ्रमण कर जाते समय भी उनके घर पर आए थे। थोड़ी देर तक फ्रेश होकर चाय पीए और उसी दिन साउथ बिहार एक्सप्रेस से रवाना हो गए। उदित सरकार कहते हैं कि एक बार तो डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल कृष्ण आडवानी व अटल बिहारी वाजपेयी आए और बैठक कर संवाददाता सम्मेलन किए। उस समय का टेबल आज भी मौजूद है। जिस उपरी कमरे में अटल विहारी वाजपेयी ठहरा करते थे, वह कमरा आज बंद पड़ा हुआ है।

सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की मिली सीख

जुगसलाई निवासी महेश चंद्र शर्मा कहते हैं कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी वाक कला में निपुण थे। उनसे कई तरह की सीख मिली। उनका कहना था कि समय पर रहो, अनुशासित रहो, विपरीत परिस्थिति में विचलित न हो, धैर्य धारण करो और सतत कर्म करते रहो। महेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि कार्यकर्ताओं ने जो उनसे सीखा उनमें सबसे महत्वपूर्ण था सत्ता प्राप्ति के लिए सिद्धांतों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना। महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि उनके आदर्शो पर चलकर ही उन्होंने लगातार लंबे समय तक पार्टी का प्रतिनिधित्व किया।

लोगों को पसंद थी सादगी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बेहद सादे तबियत के नेता थे। लोगों को उनकी सादगी बेहद पसंद आती थी। उन्हें देख कर या उनसे मिल कर नहीं लगता था कि वो इतने महान नेता हैं। जनसंघ के नेता टेल्को निवासी जयनारायण सिंह कहते हैं कि वे अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी थे। 1970 में अटल बिहारी वाजपेयी जमशदेपुर आए थे और यहां बांग्लादेश में चल रहे आंदोलन पर मंथन हुआ था।

 

Posted By: Rakesh Ranjan