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डॉ. आशा लकड़ा के बयान पर भड़का आदिवासी समाज, माझी पारगना माहाल ने की निंदा; सरना कोड की मांग तेज

Published: Thu, 10 Sep 2026 10:49 PM (IST)

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा द्वारा सरना को धर्म नहीं, केवल पूजा स्थल बताए जाने पर आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है।

माझी पारगना माहाल ने बयान की निंदा करते हुए आगामी जनगणना से पहले सरना धर्म कोड लागू करने की मांग की है।

माझी पारगना माहाल ने बयान की निंदा करते हुए आगामी जनगणना से पहले सरना धर्म कोड लागू करने की मांग की है।

HighLights

  1. डॉ. आशा लकड़ा के बयान पर आदिवासी समाज में आक्रोश।

  2. माझी पारगना माहाल ने बयान की कड़ी निंदा की।

  3. आगामी जनगणना से पहले सरना धर्म कोड की मांग।

जासं, जमशेदपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा द्वारा सरना को धर्म नहीं, केवल पूजा स्थल बताए जाने पर आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है। 
 
करनडीह स्थित दिसोम जाहेरथान में गुरुवार को देश परगना बैजू मुर्मू की अध्यक्षता में माझी पारगना माहाल (धाड़ दिशोम) की बैठक हुई।
 
इसमें एनआईटी जमशेदपुर के मंच से दिए गए डॉ. लकड़ा के बयान को हास्यास्पद बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की गई।
 

शैक्षणिक मंच पर धार्मिक व्याख्या अनुचित

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान के मंच से आदिवासी आस्था और धार्मिक परंपराओं की मनमानी व्याख्या करना पूरी तरह अनुचित है। 
 
देश भर के आदिवासी समुदाय अपनी स्वतंत्र पहचान, अनूठी परंपरा और रूढ़िवादी व्यवस्था को संजोए हुए हैं। इसमें सरना धर्म मानने वालों की संख्या सर्वाधिक है। 
 
समाज ने स्पष्ट किया कि प्रकृति पूजक आदिवासियों की सनातन या किसी अन्य धर्म से अलग एक स्वतंत्र पहचान है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।
 

जनगणना से पहले सरना धर्म कोड लागू करने की मांग

देश पारानिक दुर्गा चरण मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में लगभग 50 लाख आदिवासियों ने सरना धर्म दर्ज कराया था। आगामी जनगणना में यह संख्या करोड़ों तक पहुंचेगी। 
 
मांझी पारगना माहाल ने केंद्र सरकार से मांग की कि आगामी जनगणना से पहले सरना धर्म कोड का अलग कॉलम अधिसूचित किया जाए।
 
समाज ने चेतावनी दी कि आदिवासियों को वनवासी बताकर भ्रम फैलाने वाले अगर बयानबाजी से बाज नहीं आए, तो उनका कड़ा सामाजिक विरोध किया जाएगा। 
 
बैठक में हरिपोदो मुर्मू, दसमत हांसदा, पुन्ता मुर्मू, लखन मार्डी, नवीन मुर्मू, सुनील सोरेन, गोपाल हांसदा और सुखराम किस्कू सहित कई प्रतिनिधि मौजूद थे।

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