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सरना धर्म नहीं, आदिवासी समाज का पूजा स्थल है: एनआईटी जमशेदपुर में बोलीं डॉ. आशा लकड़ा

By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
Published: Wed, 09 Sep 2026 06:47 PM (IST)

एनआईटी जमशेदपुर में डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि सरना कोई अलग धर्म नहीं, बल्कि आदिवासी समाज का पवित्र पूजा स्थल है।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि महिलाओं को अपनी दृष्टि नहीं, बल्कि अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि महिलाओं को अपनी दृष्टि नहीं, बल्कि अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है।

HighLights

  1. महिला नेतृत्व देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  2. केंद्र की महिला कल्याणकारी योजनाओं से सशक्तिकरण में वृद्धि हुई।

जासं, जमशेदपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि सरना कोई अलग धर्म नहीं, बल्कि एक पवित्र पूजा स्थल है। 
 
जाहेर थान और सरना स्थल आदिवासी समाज के पूजा केंद्र हैं तथा आदिवासी समाज के लोग अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अंतर्गत आते हैं, न कि किसी सरना धर्म के आधार पर।


एनआईटी जमशेदपुर में बुधवार को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

दृष्टि नहीं, दृष्टिकोण बदलने की जरूरत 

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि महिलाओं को अपनी दृष्टि नहीं, बल्कि अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक महिलाओं का नेतृत्व आगे नहीं आएगा, तब तक देश के भविष्य को सशक्त नहीं बनाया जा सकता। 
 
नेतृत्व का सबसे बड़ा मंत्र समन्वय और क्षमता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में निर्णय लेने और नेतृत्व करने की क्षमता स्वाभाविक होती है। उन्हें स्वयं को पहचानने और विरोध से डरे बिना आगे बढ़ने की जरूरत है।


पश्चिमी शब्दावली पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि युवक-युवती जैसे सुंदर और भाषाई शब्द के स्थान पर आज 'जेन-जी' (Gen-Z) जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। इस नैरेटिव को बदलना अनिवार्य है।

साझा प्रयास से सम्मेलन का आयोजन 

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का संयुक्त आयोजन एनआईटी जमशेदपुर, श्रीनाथ विश्वविद्यालय और इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, सरायकेला के तत्वावधान में किया गया है।

सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ डॉ. आशा लकड़ा, न्यास की राष्ट्रीय अध्यक्ष सह भारतीय विश्वविद्यालय संघ की राष्ट्रीय महासचिव प्रो. पंकज मित्तल एवं एनआईटी के निदेशक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधर ने संयुक्त रूप से किया। 
 
इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से महिला शिक्षाविद, शिक्षण संस्थानों की पदाधिकारी और कई क्षेत्रों की महिला नेतृत्वकर्ता शामिल हुईं।
 

महिला सशक्तीकरण और भावी विमर्श 

डॉ. लकड़ा ने महिला सुरक्षा, आरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की सराहना की।
 
उन्होंने कहा कि जनधन खातों के माध्यम से देश की महिलाओं में बचत की आदत का विकास हुआ है और पिछले दस वर्षों में महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है।


सम्मेलन के आगामी सत्रों में महिला शिक्षा, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सामाजिक परिवर्तन तथा समकालीन वैश्विक एवं सामाजिक चुनौतियों पर विस्तार से विमर्श किया जा रहा है।