सरना धर्म नहीं, आदिवासी समाज का पूजा स्थल है: एनआईटी जमशेदपुर में बोलीं डॉ. आशा लकड़ा
एनआईटी जमशेदपुर में डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि सरना कोई अलग धर्म नहीं, बल्कि आदिवासी समाज का पवित्र पूजा स्थल है।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि महिलाओं को अपनी दृष्टि नहीं, बल्कि अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है।
HighLights
महिला नेतृत्व देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
केंद्र की महिला कल्याणकारी योजनाओं से सशक्तिकरण में वृद्धि हुई।
एनआईटी जमशेदपुर में बुधवार को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
दृष्टि नहीं, दृष्टिकोण बदलने की जरूरत
पश्चिमी शब्दावली पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि युवक-युवती जैसे सुंदर और भाषाई शब्द के स्थान पर आज 'जेन-जी' (Gen-Z) जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। इस नैरेटिव को बदलना अनिवार्य है।
साझा प्रयास से सम्मेलन का आयोजन
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का संयुक्त आयोजन एनआईटी जमशेदपुर, श्रीनाथ विश्वविद्यालय और इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, सरायकेला के तत्वावधान में किया गया है।
महिला सशक्तीकरण और भावी विमर्श
सम्मेलन के आगामी सत्रों में महिला शिक्षा, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सामाजिक परिवर्तन तथा समकालीन वैश्विक एवं सामाजिक चुनौतियों पर विस्तार से विमर्श किया जा रहा है।
