अमित तिवारी, जमशेदपुर। जुलाई माह में एक सप्ताह के अंदर दो बच्चा व एक जच्चा की मौत होने के बाद मामला गरमा गया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास से लेकर सरयू राय की पार्टी भाजमो भी इसमें कूद पड़ी है और कार्रवाई की मांग की जा रही है। इधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के वरीय सदस्य डॉ. सौरव चौधरी ने भी इस मामले की सही जांच के बाद ही कार्रवाई करने को कहा है। ताकि सही चीज निकलकर सामने आ सके।

पहली घटना जुगसलाई स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की है जहां पर एक मृत बच्चे का जन्म हुआ था। वहीं, दूसरी घटना महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल की है, जहां पर प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। इसके बाद दोनों के स्वजन चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। दोनों मामले की जांच चल रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट में पता चला है कि दोनों में से किसी ने भी एंटी नेटल जांच पूरी नहीं कराई थी। जबकि गर्भवती को नौ माह के दौरान चार बार एंटी नेटल जांच (एएनसी) करानी होती है। इससे जच्चा-बच्चा की स्वास्थ्य की जानकारी विस्तार से मिल पाती है। एएनसी जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कई बार देखा जाता है कि बच्चा जब गर्भ में होता है तो उसके गर्दन में अंतरी फंस जाता है। इससे उसका सांस रुकने लगता है। लेकिन, इस दौरान अगर गर्भवती की एएनसी जांच हो जाती है तो डॉप्लर मशीन से यह भी पता चल जाता है कि बच्चे का दिल कितने बार धड़क रहा है और अगर कम धड़कता है तो उसे तत्काल हायर सेंटर भेजकर उसकी जान बचा ली जाती है। लेकिन, एएनसी जांच नहीं होने से यह सब पता नहीं चल पाता है।

इसलिए एएनसी जांच जरूरी

एएनसी जांच से मां व गर्भ में पल रहे बच्चे की स्वास्थ्य की जानकारी बेहतर ढंग से मिल पाती है। गर्भवती की उच्च रक्तचाप, वजन, शारीरिक जांच, मधुमेह, हीमोग्लोबिन, एचआईवी, यूरिन के साथ जटिलता के आधार पर अन्य जांच भी की जाती है। इसके साथ ही अगर महिला एनीमिया से ग्रस्त हैं तो उसे आयरन फोलिक एसिड की दवा दी जाती है। साथ ही उसे हरी साग, सब्जी, दूध, सोयाबीन, फल, भूना हुआ चना खाने की सलाह दी जाती है।

जून माह में 43 प्रतिशत गर्भवती ही कराई एएनसी

जिला स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा देखा जाए तो जून माह में सिर्फ 43 प्रतिशत गर्भवती ही अपना पूरा एएनसी कराई है। यानी 57 प्रतिशत महिलाएं पूरा एएनसी नहीं कराई है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्रों में रजिस्ट्रेशन के बाद 65 प्रतिशत गर्भवती पहला एएनसी कराई है। यानी 35 प्रतिशत गर्भवती पहला एएनसी भी नहीं कराई है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, एमजीएम में जिस महिला की मौत हुई उसका भी एएनसी जांच एक बार भी नहीं हुई थी।

जून माह में 57 प्रतिशत महिलाओं का नहीं हुइ पूरा एंटी नेटल जांच

(एएनसी) प्रखंड : रजिस्टर्ड गर्भवती पहला एएनसी : चौथा एएनसी

बहरागोड़ा : 266 : 261 : 181

चाकुलिया : 234 : 179 : 134

धालभूमगढ़ : 158 : 136 : 87

डुमरिया : 133 : 110 : 95

घाटशिला : 199 : 170 : 128

जुगसलाई : 754 : 450 : 403

मुसाबनी : 232 : 142 : 125

पटमदा : 493 : 340 : 276

पोटका : 386 : 274 : 272

शहरी क्षेत्र : 604 : 185 : 421

-कुल : 3459 : 2247 : 2122

अ प्रैल से जून माह तक कितनी गर्भवती की हुइ एएनसी

प्रखंड : रजिस्टर्ड गर्भवती पहला एएनसी : चौथा एएनसी

बहरागोड़ा : 856 : 831 : 623

चाकुलिया : 564 : 454 : 365

धालभूमगढ़ : 414 : 380 : 265

डुमरिया : 298 : 258 : 234

घाटशिला : 619 : 521 : 428

जुगसलाई : 1299 : 840 : 869

मुसाबनी : 467 : 321 : 377

पटमदा : 725 : 543 : 541

पोटका : 935 : 746 : 773

शहरी क्षेत्र : 5167 : 4358 : 4740

कुल : 11344 : 9252 : 9215

कोट

गर्भवती एएनसी जांच नहीं कराती और अंतिम समय में अस्पताल पहुंचती है। ऐसे समय पर जब किसी जच्चा-बच्चा की मौत होती है तो सारा दोष चिकित्सकों पर गढ़ दिया जाता है, जो गलत है। एएनसी को लेकर गर्भवती महिलाओं को जागरूक होने की जरूरत है। नौ माह में कम से कम चार बार एएनसी होता है। इसे पूरा कर लेने से जच्चा-बच्चा पर खतरा कम हो जाता है और दोनों स्वस्थ होते हैं।

- डॉ. सौरव चौधरी, वरीय सदस्य, आइएमए।

 

Edited By: Rakesh Ranjan