जमशेदपुर, जासं। मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट में दो नाबालिगों के साथ यौन शोषण और प्रताड़ना के मामले में आरोपित ट्रस्ट के संचालक हरपाल सिंह थापर, वार्डेन गीता देवी, बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन पुष्पा रानी तिर्की, आदित्य सिंह और टोनी डेविड की तलाश में टेल्को थाना की पुलिस ने छापेमारी तेज कर दी है।

पुलिस की छापेमारी से पहले ही सभी आरोपित भूमिगत हो गए हैं। संचालक के घर पर भी पुलिस ने दबिश दी। पुलिस को सूचना मिली है कि बिना नंबर के वाहन से सभी भाग निकले है। हरपाल सिंह के मित्रों और फार्म हाउस पर पुलिस ने छापेमारी की है। इस मामले में घोड़ाबांधा से एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है। एसएसपी एम तमिल वानन ने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव के नेतृत्व में आरोपितों पर कार्रवाई के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। दोनों नाबालिगों से पुलिस को पूछताछ में ट्रस्ट की गतिविधि की जानकारी मिली है। गौरतलब है कि बागबेड़ा और आदित्यपुर की दो नाबालिग ट्रस्ट के लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर जान बचाने को भाग निकली थी जिन्हें पुलिस ने बिरसानगर से बरामद किया था। दोनों से पूछताछ में मिली जानकारी के बाद प्राथमिकी की कार्रवाई की गई। अभी मामले की जांच की जा रही है।

चार साल से दोनों नाबालिगों के साथ किया था जा रहा था यौन शोषण

एसएसपी ने बताया कि दोनों नाबालिगों ने पुलिस को बताया कि चार साल से हरपाल सिंह थापर समेत अन्य आरोपित उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे। यौन शोषण किया जा रहा था। जबरन काम कराया जाता था। हरपाल सिंह थापर गलत हरकत करता था। साथ में सोने को कहता था। दोनों बच्ची काफी डरी-सहमी हुई है। इतनी भयभीत है कि अपने जिले के बाल कल्याण समिति के सदस्यों के सामने भी कुछ नहीं बोलना चाहती है। कारण पूर्वी सिंहभूम जिले के बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन पुष्पा रानी तिर्की का पति हरपाल सिंह थापर ट्रस्ट का संचालक है। पुष्पा रानी तिर्की को भी इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उल्टे उन्हें धमकाया जाता रहा। चुप रहने को कहा जाता था। वार्डेन गीता देवी और उसके पुत्र भी पूरे मामले में शामिल रहे हैैं। गीता देवी का बेटा भी बच्चियों के साथ गलत हरकत करता था। संचालक और वार्डेन का बेटा पैर दबाने कहते थे। इस बहाने यौन उत्पीड़न करते थे। ट्रस्ट के फ्लैट में 23 बच्चे हैं इनमें लड़का-लड़की दोनों है। पांच की उम्र 16-17 के करीब है।

ट्रस्ट का पैसा अपने बैंक खाते में रखता था संचालक

एसएसपी ने बताया कि बच्चियों ने बताया है कि ट्रस्ट का जो भी पैसा आता है बच्चों पर खर्च नहीं कर इसे संचालक अपने बैंक खाते में रखता है। बच्चों को सही तरीके से खाना-पीना नहीं दिया जाता था। जबरन काम कराया जाता था। नहीं करने पर मारपीट की जाती थी। कपड़े भी नहीं दिए जाते थे। ट्रस्ट के पैसे को हड़पा जा रहा है। एसएसपी ने बताया कि ट्रस्ट की जांच के लिए जिला उपायुक्त से अनुशंसा की गइ है। उपायुक्त जांच कमेटी गठित करेंगे ताकि संस्था की पूरी तरह से जांच हो।

ट्रस्ट में रहनेवाले नाबालिगों को दूसरी जगह भेजा जाएगा

ट्रस्ट के बच्चों के माता-पिता का पता लगाकर उन्हें सौंप दिया जाएगा। जिनका कोई अता-पता नहीं चलेगा उन सभी को दूसरी जगह भेजा जाएगा। सरकार से मामले में पत्राचार किया जाएंगे। फिलहाल दोनों नाबालिगों को सरायकेला जिला की बाल कल्याण समिति की देखरेख में रखा गया है। दोनों नाबालिग ट्रस्ट में रहने को तैयार नहीं हैं।

 

Edited By: Rakesh Ranjan