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बेकार पड़ी है करोड़ों की मशीन, मरम्मत के बदले खरीदी जाती है नई

रमण कुमार,

हजारीबाग : लोक कल्याणकारी राज्य के सिद्धांत के तहत देश में नगर व पंचायती राज की स्थापना की गई थी। लेकिन नगर निगम लोक कल्याण के बजाए अधिकारियों के कल्याण का माध्यम का बन गया है। इसका नमूना नगर निगम कार्यालय में नित नए मशीनों की खरीदारी होती है। लेकिन थोड़ी सी मरम्मत के अभाव में कबाड़ बन चुकी मशीनों को यूं ही छोड़ दी गई हैं। यदि खराब मशीनों की मरम्मत करा दी जाती तो नई मशीन खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ती। निगम के पैसे बचते। उस पैसे से शहर का विकास होता। लेकिन अधिकारी लापरवाह बने रहते हैं।

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रावधानों के मुताबिक नगर नगर निगम को दो मद में राशि उपलब्ध कराई जाती है। जिसमें टाइड एवं दूसरा नन टाइड होता है। टाइड फंड में खर्च का अधिकार केवल नगर आयुक्त को है। इस कारण नगर निगम के कार्यपालक अधिकारी से लेकर नगर आयुक्त तक सभी मनमाने तरीके से इस फंड का दुरुपयोग करते आए हैं। ताजा उदाहरण नगर आयुक्त द्वारा कुछ माह पूर्व ही दो स्वीपिग मशीन की खरीदारी से जुड़ी है। निगम बोर्ड की बैठक में महापौर से लेकर वार्ड पार्षद तक इसका विरोध कर चुके हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों के विरोध को दरकिनार करते हुए नगर आयुक्त द्वारा करीब तीन करोड़ की राशि खर्च कर मनमाने तरीके से स्वीपिग मशीन की खरीदारी कर ली गई। इससे पूर्व तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी आशीष कुमार ने 2018 में खरीदी गई फागिग मशीन बेकार पड़ी हुई है। उससे पूर्व के कार्यपालक पदाधिकारी हाशिम ताई द्वारा वर्ष 2016 में जनप्रतिनिधियों के विरोध के बावजूद करोड़ों खर्च कर दो बाबकट मशीन एवं कई एसेसरीज की खरीदारी की गई थी। जिनमें से एसेसरीज का आज तक उपयोग नहीं किया गया, जबकि बाबकट मशीन मरम्मति के अभाव में कबाड़ बन चुकी है। इस फेरहिस्त में जेसीबी , ट्रक, ट्रै्क्टर व टीपर से लेकर अन्य कई वाहन व मशीन है। आखिर इन मामलों पर नगर विकास एवं आवास विभाग कब संज्ञान लेगा और जनता के पैसे का यह दुरुपयोग कब बंद हो पाएगा। यह सवाल गंभीर है।

Edited By: Jagran