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उत्तम संयम धर्म के रूप में मनाया गया पर्यूषण पर्व का छठा दिन

पर्यूषण पर्व की सार्थकता संयम से और संयम ही जीवन की सुरक्षा कवच

संस, हजारीबाग : जैन धर्मावलंबियों का नाम महापर्व पर्यूषण पर्व के छठे दिन दोनों दिगंबर जैन मंदिरों में प्रात: भगवान महावीर का सामूहिक अभिषेक पूजन पाठ हुआ। बाहर सांगानेर से आए पंडित संजीव ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि पर्यूषण पर्व संयम का पर्व है। संयम से आत्मा की पवित्रता का साधन है । संयम वह निधि है जो मनुष्य को पूज्य बना देती है। पंडित संजीव ने कहा कि जीवन का सुरक्षा कवच है संयम। उन्होंने कहा कि संयम धारण करके नगर के नवीन कुमार नगर गौरव बनकर तरुणाई के प्रखर वक्ता मुनि प्रमाण सागर बने और साधु परमेष्ठी जैसे पवित्र पद को धारण किया। आज शंका समाधान के माध्यम से विश्व में जैन धर्म की ध्वजा को फहरा रहे हैं। अंत में उन्होंने कहा की जीवों की रक्षा का नाम संयम है , इन्द्रिय व मन को कंट्रोल करने की भावना ही संयम धर्म है । संयम धर्म आत्मा को विशुद्ध बनाता है जिससे मोक्ष मार्ग सुनिश्चित हो जाता है , संयम के लिए तो स्वर्ग के देवता भी तरसते है । अत: संयम धर्म से आत्मा का साक्षात्कार होना चाहिए। अपराह्न में बाड़म बाजार दिगंबर जैन मंदिर में तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का वाचन हुआ। संध्या में दोनों मंदिरों में महाआरती जाप का कार्यक्रम के बाद पंडित संजीव ने मंगल प्रवचन किया। कल हुए प्रश्न मंच के विजेताओं को शकुंतला पाटोदी परिवार ,समाज के पदाधिकारी गण के द्वारा तनिष्का टोंग्या, मंजू छाबड़ा , ईशा पाटोदी, सुधा छाबड़ा, सृष्टि अजमेरा, दिवांशु लुहाडिया, सुमन छाबड़ा, अनामिका पाटोदी, जिनिशा छाबड़ा व रश्मि लुहाडीया को पुरस्कृत किया गया। मीडिया प्रभारी विजय लुहाडिया ने बताया कि दोपहर 3:00 बजे से दोनों मंदिरों में सुगंध दशमी का पर्व भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर महिलाएं उपवास पर रहेगी। धूप अर्जुन अर्पित कर सभी वर्ग के लोग वातावरण को सुगंधमय बनाएंगे।

Edited By: Jagran