संसू, टाटीझरिया (हजारीबाग): अनियमितता के मामले में एक रोजगार सेवक पर गाज गिरने के साथ ही कई अन्य लोग भी इसकी चपेट में आने लगे है। इस मामले में बीडीओ, बीपीओ, एई, जेई, मुखिया और पंचायत सचिव का रोजगार सेवक पर भरोसा करना महंगा पड़ रहा है। सेवामुक्त रोजगार सेवक, कृष्ण कुमार ने खैरा की मुखिया और वहां के पंचायत सेवक का डिजिटल लेकर भुगतान किया। भुगतान के लिए तो डिजिटल दिया गया था, पर ऑरिजनल मेठ के लिए, रोजगार सेवक ने डुप्लीकेट को भुगतान कर सब को सकते में डाल दिया। वह और कंप्यूटर ऑपरेटर के मिली भगत से यह कारनामा कृष्णा ने कर दिखाया। जब मुखिया सरिता देवी और पंचायत सेवक महाबीर यादव को इसकी भनक लगी तो इन्होंने तत्कालीन बीडीओ को इसकी जानकारी भी दिया और इन्होंने उसे नोटिस कर निकासी किये गए रुपये जमा करने का आदेश दिया था। यह नोटिस 10 अप्रैल 2018 को दिया गया था। बावजूद इसके उसने 98500 रुपये जमा कर निश्चित हो गया। फिर मुखिया ने 19 जुलाई 2019 को डीडीसी को आवेदन देकर सारी सूचना दे दिया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद मुखिया ने डीसी भुवनेश प्रताप सिंह को आवेदन उनके कार्यालय में दिया और अपने आप को निर्दोष बताया। आवेदन में उन्होंने लिखा है कि वे महिला प्रतिनिधि हैं और कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं रहने के कारण डिजिटल उसे दिया था।

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