संस, हजारीबाग: सदी के पहले और सबसे लंबे सूर्य ग्रहण का हजारीबाग में बादलों के बीच थोड़े समय के लिए दीदार हुआ। लोग तरह तरह की कवायद सूर्यग्रहण को देखने के लिए करते रहे। बादलों के बीच सुर्य ग्रहण देखने का रोमांच लोगों में सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक रहा। वहीं लंबे इस सूर्य ग्रहण को औश्र उसके प्रभाव को देखते हुए सभी मंदिरों का पट सूर्य ग्रहण काल के समय बंद रहा। दिन के करीब तीन बजे स्नान दान के बाद मंदिरों के पट खुले। भगवान को स्नान कराया गया औश्र मंदिरों की धुलाई करने के बाद गंगा जल का छिड़काव किया गया। तीन बजे के बाद पूरे विधि विधान से मंदिरों में आराध्य देव की पूजा की गई। इससे पूर्व ग्रहण को देखते हुए निर्धारित समय से पूर्व सभी मंदिरों में आरती हवन और पूजन किया गया। सुबह नौ बजे से पूर्व सभी मंदिरों में भोग का भी कार्य पूरा करा लिया गया। ज्ञात हो ग्रहण काल में पूजन से लेकर भोग कार्य बंद रहते है। हिदू मान्यता के अनुसार इस काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं होता और न दान पुण्य किया जाता है। यहीं कारण है कि सूर्य ग्रहण के तत्काल बंद लोग स्नान कर दान देते है और मंदिरों की साफ सफाई कर पूजन होता है।

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ग्रहण देखने की जुगात भिड़ाते रहे लोग, बादल ने फेरा पानी

जिले में सदी के सबसे लंबे सुर्य ग्रहण को देखने के लिए पूरे दिन लोग अपने अपने तरह से प्रयास करते रहे। हांलाकि लोगों के प्रयास पर कभी बादल तो कभी बारिश ने पानी फेर दिया। दिन के दो बजे के करीब मौसम साफ हुआ तो वैज्ञानिक पद्वति के माध्यम से लोग सुर्य ग्रहण देख सके। वहीं सुबह भी मौसम साफ होने के कारण लोग प्रारंभिक सुर्य ग्रहण देख सके।

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