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झारखंड में बच्चा चोरी का केस निकला फर्जी: माता-पिता ने खुद किया था दान, बदनामी के डर से गढ़ी झूठी कहानी 

Published: Tue, 27 Jan 2026 08:42 AM (IST)

हजारीबाग में नवजात की कथित चोरी का मामला गरीबी, बदनामी के डर और सामाजिक दबाव के कारण रची गई एक ...और पढ़ें

बच्चा का चोरी का मामला निकला फर्जी। फाइल फोटो

बच्चा का चोरी का मामला निकला फर्जी। फाइल फोटो

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संवाद सूत्र, हजारीबाग। जिस नवजात की कथित चोरी ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी, वह मामला अब गरीबी, बदनामी के डर और सामाजिक दबाव से उपजी एक सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आया है।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि नवजात की कोई चोरी नहीं हुई थी, बल्कि माता-पिता की सहमति से ही बच्चे को दूसरे व्यक्ति को सौंपा गया था। इस पूरे घटनाक्रम को बाद में बच्चा चोरी का रूप देकर गांव और प्रशासन को गुमराह किया गया।

सहेली को दिया था बच्चा 

बहिमर गांव निवासी बेबी देवी ने दो दिन पूर्व छठे बच्चे को जन्म दिया था। पहले से पांच बच्चों और कमजोर आर्थिक स्थिति से जूझ रहे परिवार के सामने छठे नवजात के पालन-पोषण की चिंता एक बड़ी मजबूरी बन गई। 

पुलिस पूछताछ में बेबी देवी ने स्वीकार किया कि वह नवजात की जिम्मेदारी उठाने की स्थिति में नहीं थी। इसी कारण उसने अपनी सहेली देवंती देवी के माध्यम से अपने रिश्तेदार मीना देवी उर्फ मालती देवी को नवजात स्वेच्छा से सौंप दिया।

हालांकि, जैसे ही मामला गांव में फैला, परिवार को सामाजिक बदनामी का भय सताने लगा। इसी डर ने साजिश का रूप ले लिया और नवजात चोरी की झूठी कहानी गढ़ दी गई। देखते ही देखते यह अफवाह फैल गई कि किसी ने बच्चा चुरा लिया है।

ग्रामीणों ने सड़क जाम कर किया था प्रदर्शन

मामला इतना बढ़ गया कि आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क जाम कर हंगामा किया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था की चुनौती खड़ी हो गई।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए छानबीन शुरू की।

त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चौपारण से मीना देवी उर्फ मालती देवी को हिरासत में लिया, जिसके पास से नवजात को सकुशल बरामद कर लिया गया।बरामदगी के बाद बच्चे को उसकी मां बेबी देवी को सौंप दिया गया है।

मामले की तह तक जाएगी पुलिस 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की विधिसम्मत जांच जारी है। झूठी सूचना फैलाकर माहौल बिगाड़ने, साजिश रचने और सड़क जाम जैसे घटनाक्रम में शामिल सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।

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मामले के खुलासे के बाद क्षेत्र में फैली अफवाहों पर विराम लग गया है, लेकिन यह घटना गरीबी और सामाजिक दबाव के उस कड़वे सच को भी उजागर करती है, जो आज भी कई परिवारों को ऐसे कठिन फैसले लेने पर मजबूर कर देता है।