जागरण संवाददाता, हजारीबाग : शहर के लोहसिघना मुहल्ला निवासी अधिवक्ता सिर्फ कोर्ट कचहरी के कार्यों में ही व्यस्त नहीं रहते हैं बल्कि समाजसेवा में भी आगे रहते हैं। क्षेत्र में गरीब, मजबूर और लाचार-बीमार की मदद करने के लिए तो जाने ही जाते हैं साथ साथ उनकी एक अलग पहचान भी बन चुकी है। गरीब बेटियों की शादी कराने में भी उन्हें भरपूर आत्म संतोष मिलता है। यही कारण है कि वर्ष 1987 से अब तक कुल 63 बेटियों के हाथ पीले करा चुके हैं। इनमें सभी जाति, धर्म और संप्रदाय की बेटियां शामिल हैं। इस पुनीत कार्य में उन्हें समाज के सभी वर्ग के लोगों का भरपूर सहयोग भी मिलता है। फिलहाल वह आगामी 28 फरवरी को एक आटो चालक की बेटी की शादी करवाने में जुटे हुए हैं। इतना ही नहीं वह समाज के कमजोर और निर्धन लोगों के इलाज और सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं। खान के अनुसार वह अब तक 50 से अधिक निर्धन लोगों के आपरेशन ओर इलाज में अपना सहयोग दे चुके हैं। समाजसेवा के कार्य में उनकी धर्मपत्नी शबनम खान भी भरपूर सहयोग देती हैं। दोनों मिलकर गरीब परिवार को चिन्हित कर उनकी मदद करते हैं। कोरोना काल के दौरान लोगों को राशन मुहैया कराने में भी उनकी महती भूमिका रही है। समाजसेवी अधिवक्ता जमील खान सर्वधर्म संभाव के लिए भी समर्पित रहते हैं। यही कारण है कि हजारीबाग की ऐतिहासिक रामनवमी महापर्व के दौरान क्षेत्र में अमन चैन और शांति व्यवस्था बहाल करने में वह प्रशासन को भरपूर सहयोग देते हैं। इसी प्रकार मुहर्रम और अन्य पर्व त्यौहारों में भी विधि व्यवस्था बहाली में महत्वपूर्ण योगदान देते नजर आते हैं। इस कार्य के लिए जिला प्रशासन द्वारा अनेकों बार उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। उनका कहना है कि जाति धर्म से उपर उठकर गरीब, असहाय की सेवा करना ही मानव धर्म है। इसकी सीख सभी धर्म देते हैं। समाज के कमजोर वर्ग की मदद करना ही उनके जीवन का मुख्य ध्येय बना गया है।

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