हजारीबाग : प्रमंडलीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उत्क्रमित किए जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने की आस जगी थी। लेकिन हुआ उल्टा। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज अस्पताल की हालत पूर्व के सदर अस्पताल से भी काफी दयनीय हो गई है। अब अस्पताल में मरीजों का इलाज के बजाए उन्हें रेफर करने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इस कारण आज लोगों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचने पर निराशा हाथ लगती है। लोग बार-बार पुराने सदर अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बताते हैं। इस क्रम में अस्पताल प्रबंधन का एक और नमूना सामने आया है। जिसमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों को धत्ता बताते हुए सर्जन ऑन डयूटी आई व इँएंडटी के डाक्टरों को बनाया गया है। इससे व्यवस्था सुधरने की बजाए बिगड़ गई है।

मरीजों के स्वास्थ्य से हो रहा है खिलवाड़

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका बड़ा उदाहरण मेडिकल काउंसलि ऑफ इंडिया के मानकों को धत्ता बताते हुए अस्पताल के सर्जरी विभागा में एमएस सर्जन की जगह नेत्र रोग विभाग व ईएंडटी विभाग के डाक्टरों की डयूटी सर्जन ऑन ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में यदि अस्पताल में कोई एक्सीडेंटल केस आता है या कोई कार्डियक एटैक का केस आता है, तो आखिर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ या ईएंडटी डाक्टर उसका कितना इलाज कर पाएंगें। ऐसी ही स्थिति में अस्पताल में डाक्टर मरीज का इलाज किए बिना उसे रेफर करना ही बेहतर समझते हैं। आखिर अस्पताल प्रबंधन मेडिकल काउंसलि आफ इंडिया के मानकों का खुला उल्लंघन कैसे कर सकता है? मरीजों के इलाज में इस प्रकार की लापरवाही पर अस्पताल प्रबंधन संज्ञान लेकर इसमें सुधार करने के बजाए सिर्फ एमसीआई का ही गीत गाता है। ऐसे में इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का अब भगवान ही मालिक है।

Posted By: Jagran

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