झारखंड: डायन-बिसाही के शक में कुल्हाड़ी से काट डाला था पूरा परिवार, 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा
गुमला के बुरुहातु गांव में 2021 के सामूहिक हत्याकांड में सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह ...और पढ़ें

25 साल बाद कोर्ट का फैसला। सांकेतिक फोटो

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जागरण संवाददाता, गुमला। झारखंड के गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र स्थित बुरुहातु आमटोली गांव में वर्ष 2021 में हुई दिल दहला देने वाली सामूहिक हत्या के मामले में जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-5 संजय कुमार सिंह की अदालत ने बुधवार को सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अंधविश्वास और डायन-बिसाही के शक में एक ही परिवार के पांच लोगों की टांगी से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य वारदात में पांच वर्षीय मासूम बच्चा भी नहीं बच सका था।
अदालत ने अमृत टोपनो, डेनियल टोपनो, सावन टोपनो, फिरंगी टोपनो, सलीम टोपनो, सोमा टोपनो और फिलिप टोपनो को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 सहपठित 120-बी तथा धारा 460/149 सहपठित 120-बी के तहत आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई । अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजा दी गई है।
5 लोगों की हत्या से दहल गया था राज्य
23 फरवरी 2021 की रात घटित इस नरसंहार ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। घटना से पहले गांव में पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें गांव के कुछ लोगों की बीमारी और मौत के लिए 55 वर्षीय जोसफीना डहंगा और उनके पति निकोदीन टोपनो को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया गया था।
पंचायत खत्म होने के बाद गांव में फैला अंधविश्वास खूनी जुनून में बदल गया। देर रात हमलावर हथियार लेकर परिवार के घर में घुस गए। इसके बाद इंसानियत शर्मसार हो गई।
हमलावरों ने जोसफीना डहंगा, उनके पति निकोदीन टोपनो, 32 वर्षीय भीमसेंट टोपनो, उसकी पत्नी सिलवंती टोपनो और पांच वर्षीय मासूम अलबिन टोपनो पर टांगी से हमला कर उनकी हत्या कर दी।
किसी को बचने का मौका तक नहीं मिला। पूरा घर चीखों और खून से भर गया था। घटना के बाद गांव में मातम और दहशत फैल गई थी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो घर के भीतर का दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया था। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि इस फैसले का इंतजार करने के लिए उस परिवार का एक भी सदस्य आज जीवित नहीं बचा।
25 साल बाद आया फैसला
तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर बालमुकुंद सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस जांच में धीरे-धीरे इस सामूहिक हत्या की साजिश का खुलासा हुआ। जांच में स्पष्ट हुआ कि अंधविश्वास और डायन-बिसाही के आरोप के कारण इस जघन्य नरसंहार को अंजाम दिया गया था।
इस घटना के बाद सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की थी। अदालत के फैसले को अब न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
