संवाद सहयोगी,गुमला : जुल्म और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले भगवान बिरसा मुंडा के नाम से गुमला शहर में संचालित होने वाला बिरसा मुंडा एग्रो पार्क के कर्मी न्याय की गुहार लगा रहे हैँ। लाकडाउन के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। दाने दाने को मोहताज होने लगे हैं। बिरसा मुंडा एग्रो पार्क में सफाई कर्मी, माली, टिकट सेलर आदि पदों के कुल 19 कर्मी कार्यरत हैं। लाकडाउन में रोस्टर वाइज उनसे काम लिया जा रहा है। महीने में केवल दस दिन ही उनसे काम लिया जाता है और जितना दिन उनसे काम लिया जाता है उतना दिन का ही वेतन उन्हें दिया जाता है। यदि किसी को छह हजार रुपया प्रतिमाह वेतन मिलता था तो प्रतिदिन दो सौ रुपये के हिसाब से किए गए कार्य दिवस की राशि उन्हें दी जाती है। ऐसे में कर्मियों को प्रत्येक कर्मी को मात्र दो हजार रुपये ही मिल पाता है। इसी दो हजार रुपये से खाने पीने और अन्य खर्च को पूरा करना पड़ता है। यह सिलसिला वर्ष 2020 अप्रैल माह से चल रहा है। पार्क के कर्मी संतराय उरांव, विदेश्वर नायक, सुनील मिज, महेश तिर्की आदि ने बताया कि पिछले वर्ष तो सरकार और संस्थाओं द्वारा राहत कार्य चलाए जाने के कारण कम प्रभावित हुए थे लेकिन इस बार पूरी तरह से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों और मंत्री डा. रामेश्वर उरांव से भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सरकारी कार्यालयों में रोस्टर से काम लेने पर भी पूरे माह की राशि मिलती है लेकिन हम गरीब मजदूरों के साथ अन्याय किया जा रहा है वह भी इस लाकडाउन में।

क्या कहते हैं अधिकारी

बिरसा मुंडा एग्रो पार्क से प्राप्त आय से ही कर्मियों को वेतन दिया जाता है। एक वर्ष से अधिक समय तक पार्क बंद रहने के कारण आय नहीं के बराबर है। पार्क के खाता में जमा राशि से ही कर्मियों को कार्य दिवस के हिसाब से राशि दी जाती है। कर्मियों की समस्या से वरीय अधिकारी को अवगत कराया जाएगा।

विभूति नारायण सिंह

जिला योजना पदाधिकारी गुमला

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