अब गांव वाले खुद करेंगे जंगल की रखवाली और प्रबंधन, गुमला के लोहड़ी गांव को मिला CFRR अधिकार
गुमला जिले के लोहड़ी गांव को सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार मिला है, जो जिले में अपनी तरह की पहली ...और पढ़ें

लोहड़ी गांव को मिला सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार। जागरण
HighLights
लोहड़ी गांव को मिला सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार।
जिले में पहली बार ग्रामसभा को मिली यह जिम्मेदारी।
जागरण संवाददाता, गुमला। जंगलों के संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी मजबूत करने की दिशा में गुमला जिले के बसिया प्रखंड की पोकटा पंचायत स्थित लोहड़ी गांव ने नई मिसाल पेश की है। गांव को सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार (सीएफआरआर) प्रदान किया गया है।
बुधवार को लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत की उपस्थिति में गांव के लोगों को अधिकार पत्र प्रदान किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में यह अपनी तरह की पहली पहल है। हालांकि, इससे पहले गुमला के 162 गांवों को 36,865.65 एकड़ वन क्षेत्र में सामुदायिक वन अधिकार मिल चुका है, जो राज्य में सर्वाधिक है।
यह उपलब्धि जंगलों के संरक्षण में ग्रामसभा की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लोहड़ी गांव को पहले ही 47.23 एकड़ वन क्षेत्र पर सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) मिल चुका है। इसके बाद ग्रामसभा ने सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया और वन प्रबंधन योजना तैयार कर उसके क्रियान्वयन की पहल की। जंगल के पुनर्जीवन के लिए बीज गेंदों के माध्यम से बीजों का प्रसार और पौधरोपण जैसे प्रयास भी किए गए।
सामुदायिक वन अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार में महत्वपूर्ण अंतर है। सीएफआर पारंपरिक वन अधिकारों को मान्यता देता है, जबकि सीएफआरआर ग्रामसभा को अपने सामुदायिक वन संसाधनों की रक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने का अधिकार देता है।
इस पूरी प्रक्रिया में प्रदान संस्थान (पीआरएडीएएन) ने ग्रामीणों को वन अधिकारों की प्रक्रिया समझने, ग्रामसभा को मजबूत करने और वन प्रबंधन योजना तैयार करने में सहयोग दिया। अब ग्रामसभा, वन विभाग और जिला प्रशासन के समन्वय से जंगलों के संरक्षण के साथ वन आधारित आजीविका को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। लोहड़ी की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए वन संपदा सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर ने बताया कि गुमला जिले के लोहरी गांव की पूरी ग्राम सभा को कम्युनिटी फारेस्ट रिसोर्स अधिकार दिया गया है, जो इस जिले में अपनी तरह का पहला मामला है। सीएफआर अधिकारों में लकड़ी को छोड़कर गैर-लकड़ी वन उपज के प्रबंधन, ट्रांजिट परमिट, बिक्री, नियमन और जुर्माना लगाने की पूरी शक्ति ग्राम सभा को मिलती है।
इसके लिए कल्याण विभाग द्वारा फंड भी दिया गया है। अगला कदम सीएफआर-एमपी बनाना है। लोहरी गांव के लोगों ने होमोजेनियस रूप से मिलकर जंगल को बचाने का बेहतरीन कार्य किया है।
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