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गुमला में कार्बाइड मुक्त फल अभियान शुरू, स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

Published: Thu, 30 Apr 2026 03:11 PM (IST)

गुमला जिला प्रशासन ने कार्बाइड से पकाए गए फलों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसे विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई करेगा।

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संतोष कुमार, गुमला। आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की तैयारी जिला प्रशासन ने शुरु कर दी है। गुमला जिले को कार्बाइड मुक्त बनाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा फल दुकानों और स्ट्रीट फूड वेंडरों पर सघन अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि फलों को पकाने में कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों का उपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच के दौरान कार्बाइड का प्रयोग पाया गया, तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फल पकना एक प्राकृतिक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें एंजाइम की क्रिया से स्टार्च शर्करा में बदलता है और फल में रंग, स्वाद व सुगंध विकसित होती है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से एथिलीन गैस के प्रभाव से नियंत्रित होती है, जो एक प्राकृतिक पादप हार्मोन है।

वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से फल पकाने के लिए एथिलीन गैस या एथ्रेल का नियंत्रित उपयोग तथा रिपनिंग चैंबर तकनीक को अपनाना ही उचित माना जाता है। कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

यह पानी के संपर्क में आने पर एसीटिलीन गैस उत्पन्न करता है, जिसमें आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे विषैले तत्व मौजूद हो सकते हैं। ऐसे फल खाने से सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, आंख और त्वचा में जलन, सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

लंबे समय तक इसके सेवन से तंत्रिका तंत्र पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है, जो विशेष रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। विभाग ने उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। अत्यधिक चमकीले और एकसमान रंग वाले, बिना सुगंध वाले या अंदर से कच्चे दिखने वाले फल संदिग्ध हो सकते हैं।

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फलों को पकाने के लिए प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग ही सुरक्षित माना जाता है। केले, आम और पपीता जैसे फलों को बंद वातावरण में रखने से वे स्वयं एथिलीन गैस छोड़ते हैं, जिससे पकने की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से तेज हो जाती है। नियंत्रित मात्रा में एथिलीन गैस या एथ्रेल का उपयोग भी वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित है, जिसे कोल्ड स्टोरेज या रिपनिंग चैंबर में अपनाया जाता है। रिपनिंग चैंबर में तापमान और आर्द्रता को संतुलित रखकर फल समान रूप से पकाए जाते हैं। इसके अलावा पारंपरिक घरेलू तरीके, जैसे फलों को कागज या भूसे में रखकर पकाना, भी सुरक्षित और स्वास्थ्य के अनुकूल तरीका माना जाता है।

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अटल तिवारी, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र गुमला

कार्बाइड से पकाया गया फल खाना सेहत के लिए नुकशानदेह है। पेट संबंधी कई तरह की बीमारियां हो सकती है। धीरे धीरे यह गंभीर रुप भी ले सकता है। इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए। हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदना चाहिए। खाने से पहले उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए, कुछ देर पानी में रखना भी चाहिए।

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डॉ. अनुपम किशोर, उपाधीक्षक सदर अस्पताल गुमला

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