गुमला में सैलरी भुगतान में गड़बड़ी की आशंका पर प्रशासन सख्त, 140 कर्मियों के खातों की होगी जांच
गुमला प्रशासन ने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संभावित अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
गुमला में वेतन-भुगतान की गहन जांच शुरू।
140 कर्मियों के खातों की होगी पड़ताल।
तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया।
जागरण संवाददाता, गुमला। जिले में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संभावित अनियमितताओं पर लगाम कसने के उद्देश्य से प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है।
विभिन्न कार्यालयों में प्रतिनियुक्त कर्मियों के वेतन, मानदेय और अन्य भुगतानों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई से संबंधित विभागों और महकमे में हड़कंप की स्थिति बन गई है। हजारीबाग और बोकारो जिले में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की घटना के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।
140 कर्मियों के खाते की जांच
जानकारी के अनुसार, जिले के अलग-अलग कार्यालयों में तैनात 66 गृह रक्षक, आउटसोर्सिंग एजेंसी प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के 30 कर्मी तथा मेसर्स एवरग्रीन सर्विस लिमिटेड के 44 कर्मियों के भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों और अभिलेखों की बारीकी से जांच की जाएगी।
ताकि संभावित अनियमितता पर रोक लगाई जा सके। प्रशासन का मानना है कि समय रहते जांच पूरी कर ली गई तो किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या फर्जी भुगतान को रोका जा सकेगा।
दरअसल, हाल ही में हजारीबाग और बोकारो जिलों में कोषागार से अवैध राशि निकासी के मामले सामने आने के बाद राज्य स्तर पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
इसी के मद्देनजर गुमला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है, ताकि जिले में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की आशंका को पहले ही समाप्त किया जा सके।
3 सदस्यीय टीम का गठन
प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को प्रभावी और निष्पक्ष बनाने के लिए तीन सदस्यीय अधिकारियों की टीम का गठन किया है। इस टीम में भूमि सुधार उप समाहर्ता राजीव कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रदीप भगत और जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खां को शामिल किया गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी भुगतान से जुड़े अभिलेखों की गहन पड़ताल कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। प्रशासन के इस सख्त कदम के बाद जिले के विभिन्न विभागों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों में हलचल तेज हो गई है।
कई कार्यालयों में पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों को दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो गई है।
सूत्रों की मानें तो यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित कर्मियों और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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