यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गोड्डा में हिट वेब शुरू, अधिकतम तापमान 40 के पार पहुंचा
साल की पहली हिट वेब शुरू अधिकतम तापमान 40 के पार पहुंचा

गोड्डा में हिट वेब शुरू, अधिकतम तापमान 40 के पार पहुंचा
संस, गोड्डा : जिला में इस साल मार्च के महीने से ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। गर्मी का सितम अभी से ही बढ़ता जा रहा है। अप्रैल माह में पड़नेवाली गर्मी का अहसास अभी से ही होने लगा है। सूरज की तपन ने दोपहर होने से पहले ही लोगों को घरों में दुबकने को विवश कर दिया है। दो दिनों में गोड्डा में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में पांच से छह डिग्री की बढ़ोlरी देखी गई। मौसम विभाग के मुताबिक अगले सप्ताह भर अधिकतम तापमान 41 डिग्री तक चला जाएगा। इस दौरान गर्म हवा भी चलेगी।मौसम के बदलते मिजाज से लोगों की परेशानी बढ़ने लगेगी है। जिला में रविवार और सोमवार को अधिकतम तापमान 40 के पार रिकार्ड किया गया है। केवीके आटोमैटिक वेदर सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार 20 मार्च को अधिकतम तापमान 40.7 डिग्री, जबकि न्यूनतम तापमान 22.7 डिग्री और 21 मार्च को अधिकतम तापमान 40.9 डिग्री व न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री रिकार्ड किया गया।
जिला कृषि मौसम इकाई, गोड्डा के मौसम सह कृषि विज्ञानी रजनीश प्रसाद राजेश ने कहा कि पूर्व में ही इस बार जनवरी और फ़रवरी में पड़ने वाली भीषण ठंड से जिले के लोगों को आगाह किया था और इस बार मार्च से ही भीषण गर्मी पड़ने के संकेत दिए गए थे, जो अब दिखने लगा है। कहा कि इसका सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। गर्मी की इस स्थिति का कारण पश्चिमी भारत के ऊपर अरब सागर और हिंद महासागर से पर्याप्त नमी वाली हवाओं और मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) से चलने वाली शुष्क हवाओं की अनुपस्थिति में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सीज़न की पहली हीट वेब है।
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क्या होता है एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन ः मौसम विज्ञानी रजनीश प्रसाद ने कहा कि एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का मतलब असल में हवा का बिखरना है। जैसा कि इसका नाम है, एंटी-साइक्लोन में हवा की दिशाएं साइक्लोनिक हवाओं की दिशा के विपरीत होती हैं। साइक्लोनिक सर्कूलेशन में लो-प्रेशर एरिया बनता है और हवाएं आपस में मिलकर उठती हैं। एंटी-साइक्लोनिक साइक्लोनिक सर्कूलेशन में हाई-प्रेशर एरिया बनता है जिसमें हवाएं बिरखती हैं और नीचे गिरती हैं। एंटी साइक्लोन के बीच के हिस्से में हाई-प्रेशर के चलते एक तेज हवा का ब्लास्ट ऊपर से नीचे की तरफ होता है। हवा कंप्रेस होने की वजह से और गर्म होती है और उसकी नमी भी कम होती है। गर्म हवाएं हाई-प्रेशर एरिया से लो-प्रेशर एरिया की तरफ बढ़ती हैं। नार्दन हेमिस्फियर में एंटी साइक्लोनिक हवा क्लाकवाइज चलती हैं, जबकि साउदर्न हेमिस्फियर में यह एंटी क्लाकवाइज चलती हैं। दूसरी ओर गेंहू की पैदावार लेने वाले किसानों में गर्मी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। तापमान में बढ़ोतरी से फसल को नुकसान हो सकता है।