UGC नोटिफिकेशन की भ्रांतियां दूर करेगी सरकार! मोदी है तो मुमकिन है... निशिकांत दुबे के पोस्ट के सियासी मायने
UGC Notification Row: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइन पर देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। भाजपा सांसद ...और पढ़ें

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे यूजीसी गाइडलाइन पर सरकार का कर रहे बचाव।
HighLights
UGC की नई गाइडलाइन पर देशभर में बहस तेज।
निशिकांत दुबे ने गाइडलाइन का खुलकर बचाव किया।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के पोस्ट के निकाले जा रहे मायने।
जागरण संवाददाता, गोड्डा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइन को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। खासतौर पर इंटरनेट मीडिया पर इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।
भाजपा के पारंपरिक माने जाने वाले स्वर्ण वर्ग के एक हिस्से में नाराज़गी देखी जा रही है, वहीं विपक्षी दलों और भाजपा विरोधी समूहों ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
इसी बीच गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 23 और 24 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगातार दो पोस्ट कर UGC की गाइडलाइन का खुलकर बचाव किया। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
हालांकि उनके इन बयानों के बाद इंटरनेट मीडिया पर उन्हें तीखी आलोचना और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। एक वर्ग ने उनके खिलाफ ऑनलाइन अभियान छेड़ दिया है और 2029 के लोकसभा चुनाव में “सबक सिखाने” जैसी बातें भी कही जा रही हैं।
विवाद बढ़ने के बावजूद निशिकांत दुबे अपने रुख पर कायम हैं। 25 जनवरी को किए गए एक और पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मोदी है तो मुमकिन है, विश्वास रखिए UGC नोटिफिकेशन की सभी भ्रांतियां दूर की जाएंगी।”
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के बीच भेदभाव का प्रावधान नहीं है। साथ ही उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी को दिया।
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दुबे के इन बयानों के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या केंद्र सरकार इस विवाद पर कोई “बीच का रास्ता” निकालेगी? क्या UGC गाइडलाइन में संशोधन संभव है या फिर सरकार पूरी तरह अपने फैसले पर कायम रहेगी?
फिलहाल आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में शिक्षा नीति और सामाजिक न्याय की राजनीति के केंद्र में बना रहेगा।
मोदी है तो मुमकिन है,विश्वास रखिए UGC नोटिफिकेशन की सभी भ्रान्तियों को दूर किया जाएगा । संविधान को आर्टिकलों 14 एवं 15 के अनुसार अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग में कोई फर्क नहीं है। 10 प्रतिशत आरक्षण सामान्य वर्ग को केवल और केवल माननीय प्रधानमंत्री मोदी…
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) January 25, 2026
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