जागरण टीम, गोड्डा : जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के चैती दुर्गा मंदिर व पूजा पंडालों में सोमवार को देवी भगवती दुर्गा की नवपत्रिका प्रवेश करने सहित विभिन्न देवी-देवताओं की स्थापना के साथ ही मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के पूजन व दर्शन को लेकर खोल दिये गये। इसके साथ ही चेती दुर्गा पूजा शुरु हो गया। चैत रामनवमी के सातवें दिन सोमवार को माता भगवती के सप्तमी रूप काल रात्री रूप की आराधना की गई। इसके अलावा जगह-जगह विविध आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयेाजन किया जा रहा है। इधर जिला मुख्यालय के चैती दुर्गा मंदिर परिसर में सोमवार को अहले सुबह से ही चहल पहल बढ़ गई। विल्वभरणी का पूजन करने के उपरांत नवपत्रिका प्रवेश कराया गया और पूजन के साथ ही सभी प्रतिमाओं को स्थापित कर यथा स्थान विराजमान कर दिया गया। परंपरा के तहत बजरंगबली को मुख्य द्वार पर ही रखा गया जबकि बगल में बने पंडाल में भी अन्य प्रतिमाओं को रखा गया है। जबकि मुख्य मंदिर में मां भवगती दुर्गा सहित अन्य प्रतिमाओं को आकर्षक रूप दिया गया है। कपाट खुलने के बाद ही श्रद्धालुओं के आने- जाने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। कोविड के गाइड लाइन का पालन करते हुए मंदिर परिसर में भीड़ नहीं लगाने की हिदायत दी जा रही है। यही कारण है कि लोग आते हैं और मां का दर्शन कर अपने घर को वापस हो जाते हैं। इस बार भी मेला नहीं लगा है और न ही शोरगुल व विशेष तामझाम है। पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण में मां की पूजा हो रही है। --------------------- संबाद सहयोगी , ललमटिया : लोहंडिया बाजार स्थित श्री श्री 108 चैती दुर्गा मंदिर में सोमवार को मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना विधि विधान से किया गया। आचार्य पंकज ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी - काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। मां के इस स्वरूप की पूजा- अर्चना करने से व्यक्ति पर आने वाले आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है। माँ का यह स्वरूप शत्रु और दुष्टों का संहार करने वाला है। माना जाता है कि देवी के इस रूप में सभी राक्षस,भूत, प्रेत, पिसाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है, जो उनके आगमन से पलायन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मां के इस स्वरूप की पूजा अर्चना के माध्यम से भक्तगण कोरोना वायरस बढ़ते संक्रमण को रोकने की मन्नत मांग रहे हैं। निश्चित रूप से मां बढ़ते कोरोनावायरस संक्रमण को रोक कर अपने भक्तों को भयानक महामारी से रक्षा करेगी। हालांकि कोरोनावायरस संक्रमण के कारण मंदिरों में भक्तजनों एवं दर्शकों का आना जाना नहीं के बराबर हो रहा है ।मंदिर परिसर में बिल्कुल सन्नाटा छाया हुआ रहता है। ------------------- मेहरमा प्रखंड के दरियापुर एवं बाबाजी पहाड़पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां धुमधाम से पूजन किया जा रहा है।

संवाद सहयोगी ठाकुरगंगटी

प्रखंड क्षेत्र के कजरैल , रुंजी व मानिकपुर गांव के दुर्गा मंदिरों में बीते छह दिनों से लगातार विधि-विधान , हर्षोल्लास , धार्मिक आस्था विश्वास के साथ चैती दुर्गा पूजा की चंडी पाठ की जा रही है । सोमवार को सप्तमी तिथि के अवसर पर सभी मंदिरों में मां दुर्गा की सातवें रूप की चंडी पाठ , पूजा अर्चना की गई। सप्तमी तिथि के अवसर पर ही मंदिरों में प्रतिमा को भी स्थापित कर दिया गया। सोमवार को प्रतिमा स्थापित करने के बाद धीरे धीरे प्रतिमा का दर्शन और पूजा पाठ करने के लिए श्रद्धालु मंदिर में पहुंच रहे हैं । लेकिन झारखंड सरकार और जिले के साथ-साथ प्रखंड , थाना कि पुलिस , प्रशासन द्वारा लगाए गए नियमों के आधार पर ही दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारी , सदस्य और ग्रामीण काम कर रहे हैं। मंदिर व मंदिर परिसर में दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों एवं गणमान्य ग्रामीणों द्वारा श्रद्धालुओं को काफी समझाया बुझाया जा रहा है। जो भी ग्रामीण श्रद्धालु मंदिर में प्रतिमा के दर्शन करने पहुंचते हैं उसे मास्क लगवा कर ही दुर्गा मंदिर परिसर में प्रवेश करने दिया जाता है। साथ ही साथ सैनिटाइजर का भी उपयोग कराया जा रहा है। और शारीरिक दूरी तो हर परिस्थिति में लागू है । एक साथ पांच पांच मीटर की दूरी पर चार श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर मैं प्रवेश कराई जा रही है । मंदिर परिषर में प्रवेश करने से पूर्व नवरात्र के उपासकों व अन्य श्रद्दालुओं को दुर्गा पूजा समिति व जिला परिषद सदस्य निरंजन पोद्दार द्वारा मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध कराया जा रहा है। ताकि खतरे से बचा जा सके। श्रद्धालुओं से यह आग्रह किया जा रहा है कि सिर्फ प्रतिमा का दर्शन कर हाथ जोड़कर प्रणाम करने के बाद एक से दो मिनट के अंदर मंदिर व मंदिर परिसर से बाहर निकल जाएं। क्योंकि वर्तमान समय में पूरे देश और राज्य के साथ-साथ लगभग प्रत्येक गांव में कोरोना का महा कहर लगातार जारी है । और इस। कोरोना काल की भयावह स्थिति से स्वयं भी बचना है और सबों को भी बचाना है। यह बहुत बड़ी परीक्षा की घड़ी है। इसलिए परिस्थिति के अनुसार आस्था को प्रकट करते हुए एक से दो मिनट में ही प्रतिमा का दर्शन कर संतुष्ट हो जाना है। आने वाले वर्षों में जब सब कुछ ठीक-ठाक रहेगा तो फिर विस्तार रूप से सभी श्रद्धालु पूजा-अर्चना प्रतिमा का दर्शन सहित अन्य धार्मिक कार्य एक साथ मिलकर कर सकेंगे । साथ ही साथ अन्य प्रकार का धार्मिक व रंगारंग कार्यक्रम भी हो सकेगा । इस बार तो दुर्गा पूजा समिति और ग्रामीणों ने बिल्कुल सादगी पूर्वक खुद बचते हुए और सबों को बचाने का प्रयास करते हुए दुर्गा पूजा संपन्न करने का निर्णय लिया है । इसलिए सादगी पूर्वक दुर्गा पूजा मनाई जा रही है । प्रखंड के पुलिस , प्रशासन और दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारियों , सदस्यों जिला परिषद सदस्य निरंजन पोद्दार सहित अन्य समाजसेवी , सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा प्रखंड क्षेत्र के गांव में यह आग्रह रूपी चेतावनी दे दी गई है कि इस कोरोना काल के महाकाल में कोई भी व्यक्ति बेवजह अपने घरों से नहीं निकलें । सबसे पहले स्वयं सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रहने दें। हर संभव एक दूसरे का सहयोग करें और सभी घर में रहकर सबको अपना अपना बचाव करना ही दूसरों की भी सुरक्षा करना साबित हो रहा है । बहुत जरूरी पड़ने पर अगर बाहर निकलें भी तो मास्क और सेनीटाइजर लगाकर ही बाहर निकलें। साथ ही साथ कोई भी व्यक्ति कहीं मिले तो कम से कम दो मीटर की दूरी बनाकर ही चंद मिनट में अपनी बातों को खत्म कर दें । अभी कोई हालचाल कोई किस्सा , कहानी करना खतरे से खाली नहीं होगा। सभी गांव के दुर्गा पूजा समिति और गणमान्य ग्रामीण सामाजिक कार्यकर्ता , समाजसेवी कड़ी मेहनत कर रहे हैं कि किसी भी प्रकार से संक्रमण को हर परिस्थिति में रोका जाए । ताकि जल्द से जल्द कोरोना को काबू कर सकें। इस कार्य में दुर्गा पूजा समिति के व्यवस्थापक सह जिला परिषद सदस्य निरंजन पोद्दार , अध्यक्ष पारसनाथ चौधरी , उपाध्यक्ष अरविद पोद्दार , कोषाध्यक्ष घनश्याम पोद्दार , उप कोषाध्यक्ष जगन्नाथ पासवान , सचिव सह पुजारी अर्जुन यादव , उप सचिव निरंजन पासवान बुजुर्ग गुलाबी पोद्दार , पंडित अविनाश पांडे सहित दुर्गा पूजा समिति के अन्य पदाधिकारी , सदस्य , बुजुर्ग गणमान्य ग्रामीण , शिक्षाविद , समाजसेवी , सामाजिक कार्यकर्ता सहित सभी लोग सहयोग कर रहे हैं। -------------------- मेहरमा के

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