गोड्डा : शहरवासी बीते एक दशक से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। लंबे अरसे बाद शहरी जलापूर्ति योजना को करीब तीन वर्ष पूर्व स्वीकृति मिली जिस पर काम भी शुरू हुआ लेकिन इसके बाद भी जलापूर्ति योजना से शहर वासियों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस दौरान अवधि विस्तार भी किया गया और डेडलाइन तय की गई लेकिन सब से सब फेल होते चले गए। हालात यह है जो कार्य प्रगति है, उसमें अगले छह माह में भी पानी मिल जाय तो काफी होगा। वर्तमान में चल रही पुरानी जलापूर्ति योजना जो अघोषित रूप से डेड हो चुकी है, से लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। पिछले तीन चार साल से तो शहरवासियों को गंभीर जलसंकट से जूझना पड़ रहा है। इस साल की गर्मी में तो सबसे खराब स्थिति बन गयी। शहर के कई वार्ड में टैंकर से पानी की आपूर्ति की गयी। समस्या दिनों-दिन गंभीर होती जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार शहर की पेयजल समस्या को देखते हुए करीब पांच साल पूर्व नई जलापूर्ति योजना को स्वीकृति प्रदान की गयी थी। जिसकी लागत सौ करोड़ से अधिक है। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम शुरू किया गया। सुंदर जलाशय से शहर को पाइप लाइन के माध्यम से पानी आपूर्ति की जानी है। इसके लिए पाइपलाइन बिछाने के काम के साथ जलाशय में इंटेकवेल निर्माण का कार्य किया जा रहा है। साथ ही शहर में पांच वाटर टावर का निर्माण के साथ शहर की गलियों में पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन आजतक लोगों को नई योजना से पानी नहीं मिल पाया है। इस संबंध में शहरवासियों का कहना है कि पानी तो मिल नहीं रहा अलबत्ता लगभग दो साल से गलियों की सड़क भी तोड़ दी गयी है। जहां न तो मरम्मत कार्य हो पा रहा है न ही पानी ही मिल पा रही है। कारण भी स्पष्ट है जबतक पाइप लाइन से पानी का कनेक्शन नहीं हो जाता है तब तक कोई कार्य भी नहीं हो सकता है। इधर नई योजना में हो रही विलंब को देखते हुए बीते माह में नगर परिषद बोर्ड की बैठक हुई थी जहां कार्य में लगी एजेंसी को हर हाल में 15 अक्टूबर तक कार्य पूरा करने के लिए कहा गया था लेकिन जो कार्य प्रगति है अगले छह माह में शहरवासियों को सुंदर जलाशय से पानी मिलने के आसार नहीं है। बहरहाल नई जलापूर्ति योजना चालू नहीं होने से शहर की करीब साठ हजार आबादी को पाइप लाइन से पानी नहीं मिल पा रहा है।

Posted By: Jagran

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