मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

गोड्डा : आसन्न चुनाव में युवा वोटरों के लिए सबसे मुद्दा उनका करियर है। सरकारी नौकरियों की तलाश में शिक्षित बेरोजगारों की फौज देश में खड़ी हो रही है।

गोड्डा संसदीय क्षेत्र के युवा वोटर भी इसी से इत्तेफाक रखते हैं। सरकारी नौकरियों में संविदा के चलन को युवा वोटर अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ मानते हैं। गोड्डा के फसिया डंगाल मुहल्ला में संचालित संगम आइएएस एकेडमी में अपने करियर के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे युवाओं ने जागरण को बताया कि देश में रोजगार के अवसर तो बढ़े लेकिन नौकरियों का टोटा लगा हुआ है। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर वर्षों से स्थाई बहाली नहीं हो रही है। संविदा के आधार पर एक वर्ष के लिए युवाओं को मामूली मानदेय पर काम कराया जाता है। इससे उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है।

अब जबकि लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, तो पहली बार वोट डालने वाले युवाओं के दिलों में भी कई हसरतें पलने लगी है। भारत सबसे युवा देश माना जाता है। पीएम मोदी अपने भाषण में इसका उल्लेख कर चुके हैं। देश में दो करोड़ से ज्यादा ऐसे मतदाता हैं जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है। हर राजनीतिक दल युवाओं को लामबंद करने की कोशिश में जुटा हुआ है। राजनीतिक दल लैपटॉप, फ्री वाई-फाई व शिक्षा व•ाीफा देने का वादा अपने घोषणा पत्र में कर चुके हैं। फोर जी स्पीड इंटरनेट के साथ काम करने वाले युवा मतदाता अब राजनीति को भी साधने में जुटे हुए हैं। वोट की शक्ति भी वे भलीभांति परिचित हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत का आधार भी युवाओं का झुकाव था। इस बार रो•ागार की बाट जोहता युवा वर्ग अपनी प्राथमिकता क्या तय करता है, यह सभी राजनीतिक दलों के लिए यक्ष प्रश्न सरीखा है। पकौड़ा तलने को रो•ागार मानना और एससी/एसटी कानून को ले युवा मतदाता का एक बड़ा समूह हाल के विधानसभा चुनावों में अपनी प्रतिक्रिया दे चुका है। स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप और मुद्रा जैसी योजनाएं रो•ागार सृजन में विफल रही हैं और शिक्षा के क्षेत्र में बजट में कटौती से भी निराशा है। बावजूद इसके युवाओं में पीएम मोदी का क्रेज आज भी बरकरार है। अधिकांश युवाओं ने कहा कि पीएम मोदी से बहुत उम्मीद है। राष्ट्रवाद को लेकर भाजपा के स्टैंड को भी युवा पसंद कर रहे हैं।

इस कड़ी में पेश है युवा वोटरों से बातचीत के अंश : गोड्डा के बाबुल कुमार कहते हैं कि रोजगार से करियर संवारना तो अंतिम विकल्प है। डिग्री हासिल करने के बाद सबसे पहले सरकारी नौकरी की ही तलाश रहती है। बैंक, रेलवे, सिविल सर्विसेज, एसएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहा हूं। सफलता नहीं मिलने पर ही स्वरोजगार की सोच सकता हूं। वहीं संगम एकाडमी की भारती कुमारी, निर्मला कुमारी, पम्मी कुमारी, प्रीति कुमारी वन और प्रीति कुमारी टु का तर्क कुछ अलग है। इन छात्राओं का कहना है कि महिलाओं को सभी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल रहा है। वे सभी सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही हैं। उनके बैच की तीन छात्राओं को गत वर्ष इसमें सफलता भी मिली है। महिलाओं की सुरक्षा और समाज में उनकी भूमिका को लेकर मौजूदा सरकार ने जो कार्य किए हैं, उससे वे सभी प्रभावित हैं। पीएम मोदी की तुलना में देश में ऐसा कोई राजनेता नहीं है तो देश का सम्मान बढ़ा सके। राहुल गांधी भी छात्राओं में लोकप्रिय हैं। वहीं उक्त संस्थान में ही अध्ययनरत राहुल कुमार, ऋषिकेश कुमार, संजू कुमारी और संस्थान के संचालक जेके भगत का कहना है कि परीक्षाओं में धांधली पूर्ववर्ती सरकार में भी होती थी और वर्तमान सरकार में भी हो रही है। ऐसे में इस चेतनाशील जमात का मत किधर जाएगा, यह अनुमान लगाना अंधेरे में तीर मारने के समान है। मौजूदा राजनीति को देखकर अब इस बात में कोई संशय नहीं है कि युवाओं की भूमिका को कोई भी राजनीतिक दल नजरंदाज नहीं कर सकता है। युवा जिस भी दल की तरफ रूझान प्रदर्शित करेंगे, निश्चित ही उस दल को फायदा पहुंचेगा।

Posted By: Jagran

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