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देवरी में छापेमारी को रात तीन बजे घर में घुसी पुलिस, कुचल गया चार दिन का नवजात; CM सोरेन ने दिए जांच के आदेश

Police trampled Newborn बच्चे के दादा ने आरोप लगाया कि पुलिस टीम के किसी सदस्य के पैर से नवजात कुचल गया। मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सीएम से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि लीपापोती शुरू हो उससे पहले पुलिसवालों पर एफआइआर कर जेल भेजें।

By Prabhat Kumar SinhaEdited By: Roma RaginiThu, 23 Mar 2023 08:15 AM (IST)
देवरी पुलिस की पैर से कुचल गया नवजात

संवाद सहयोगी, देवरी (गिरिडीह)। देवरी थाना क्षेत्र के कोसोगोंदोदिघी गांव से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। मंगलवार की रात करीब तीन बजे वारंटी को पकड़ने गई पुलिस के पैर के नीचे एक नवजात आ गया।  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

देवरी थाना क्षेत्र के कोसोगोंदोदिघी गांव की घटना है। मरने वाला बच्चा रमेश पांडेय का पुत्र श्रवण कुमार था। उसकी उम्र महज चार दिन थी। रमेश ने थाने में देवरी थाना पुलिस टीम के किसी सदस्य के पैर से दबकर बच्चे की मौत होने का आरोप लगाकर शिकायत की है। मामले की जांच शुरू हो गई है।

बच्चे के दादा व वारंटी भूषण पांडेय ने रोते हुए बताया कि पुलिस रात करीब तीन बजे घर गई। पुलिस ने धक्का मारकर दरवाजा खोल भी दिया। इसके बाद सीधे घर में घुस गई। पुलिस को देखकर चौकी पर सोई घर की महिला हड़बड़ाकर उठ गई, मगर नवाजत सोया रह गया।

(रोते नवजात के दादा)

दादा का आरोप है कि घर के अंदर गई पुलिस का पैर मासूम पर पड़ा और उसकी जान निकल गई। सूचना पाकर गावां इंस्पेक्टर सहदेव प्रसाद, देवरी थाना प्रभारी संगम पाठक पहुंचे।बीडीओ इंद्रलाल ओहदार व सीओ राजमोहन तुरी की मौजूदगी में पंचनामा हुआ। घटना को लेकर क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।

सीएम ने की शीघ्र जांच रिपोर्ट तलब

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से शीघ्र जांच रिपोर्ट तलब की है। एसपी अमित रेणु, मुख्यालय डीएसपी संजय राणा समेत अन्य अधिकारी जांच के लिए देवरी पहुंचे।

बाबूलाल मरांडी ने कहा-ये शर्मनाक घटना

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने नवजात की मौत के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया और कार्रवाई की मांग की है। अपने ट्वीट में इसे रोंगटे खड़ी करने वाली शर्मनाक घटना बताया है। सीएम से संज्ञान लेने की मांग की। यह भी कहा कि लीपापोती शुरू हो, उससे पहले पुलिसवालों पर एफआइआर कर जेल भेजें।